हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल, OPD में मरीज बेहाल

हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की दो दिन की हड़ताल शुरू। OPD सेवाएं प्रभावित, मरीज लाइन में परेशान। ACP और भर्ती मांगें न मानने पर 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।

हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल, OPD में मरीज बेहाल
  • हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की दो दिन की हड़ताल शुरू
  • 3900 में से 3000 डॉक्टर सेवा से बाहर; OPD प्रभावित, मरीजों की लंबी लाइनें
  • मांगे न मानीं गईं तो 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल

हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की दो दिवसीय हड़ताल सोमवार सुबह से शुरू हो गई। डायरेक्ट एसएमओ भर्ती सहित विभिन्न मांगों के पूरा न होने पर सरकार के खिलाफ हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएस) ने हड़ताल का फैसला लिया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में तैनात 3900 डॉक्टरों में से करीब 3000 डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने का अनुमान है।

पंचकूला सिविल अस्पताल में मुलाना मेडिकल कॉलेज से आए दो डॉक्टर के सहारे मेडिसिन ओपीडी चलाई जा रही है। केबिन के बाहर लगी मरीजों की लाइन।

सरकार और डॉक्टरों के बीच रविवार देर रात तक बातचीत चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद डॉक्टरों ने घोषणा की कि 8-9 दिसंबर को दो दिन की हड़ताल रहेगी और यदि सरकार मांगों पर निर्णय नहीं लेती है तो 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

अस्पतालों में OPD व्यवस्था अस्त-व्यस्त
सोमवार सुबह जैसे ही अस्पतालों में OPD शुरू होनी थी, डॉक्टर अपने केबिन में नहीं पहुंचे। मरीज केबिन के बाहर लंबी लाइन में खड़े दिखाई दिए। पंचकूला सिविल अस्पताल में स्थिति गंभीर नजर आई। यहां व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुलाना मेडिकल कॉलेज से दो डॉक्टर बुलाए गए, जिनके सहारे मेडिसिन OPD चलाई जा रही है

पांच दिसंबर की बैठक बेनतीजा
5 दिसंबर को चंडीगढ़ में सरकार और एचसीएमएस की बैठक हुई थी, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। महेंद्रगढ़ जिला अध्यक्ष डॉ. विवेक शर्मा ने बताया कि जब तक ACP की मांग पर ठोस फैसला नहीं होता, हड़ताल वापस नहीं होगी।

सरकार से तीन दौर की वार्ता
डॉ. शर्मा के अनुसार चर्चा मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, और स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल के साथ तीन चरणों में हुई, लेकिन फाइनल डिसीजन नहीं हो सका

संभावित असर
यदि हड़ताल लंबी चलती है तो आउटडोर-इंडोर सेवाएं, सर्जरी, आपातकालीन उपचार सहित गंभीर मरीजों के लिए स्थितियां और अधिक चिंताजनक हो सकती हैं।