हरियाणा में LPG संकट: महिलाओं की लंबी लाइनें, ढाबों में चूल्हे जलने लगे गैस की किल्लत से शादियों पर असर
हरियाणा में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत बढ़ने से कई जिलों में महिलाएं लंबी कतारों में खड़ी हैं। पानीपत के मैरिज पैलेस में लकड़ी-कोयले पर खाना बन रहा है, जबकि मुरथल के ढाबों ने इंडक्शन चूल्हों और भट्ठियों का सहारा लिया है।
■ हरियाणा के कई जिलों में गैस सिलेंडर के लिए महिलाओं की लंबी लाइनें
■ पानीपत के मैरिज पैलेस में लकड़ी-कोयले पर बन रहा शादी का खाना
■ मुरथल के ढाबों ने इंडक्शन चूल्हे मंगवाए, गैस का इस्तेमाल 70% तक घटा
हरियाणा में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत अब आम लोगों से लेकर बड़े कारोबार तक को प्रभावित करने लगी है। प्रदेश के भिवानी, गुरुग्राम, रोहतक और रेवाड़ी जैसे कई जिलों में शुक्रवार सुबह से ही महिलाएं गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़ी नजर आईं। कई लोगों का कहना है कि सिलेंडर बुक कराने के बावजूद घर तक डिलीवरी नहीं हो रही, जिसके कारण उन्हें खुद लाइन में लगकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है। इस संकट का असर अब शादी समारोहों और मशहूर ढाबों तक भी पहुंच गया है।
भिवानी की रहने वाली पिंकी ने बताया कि उन्होंने कई दिन पहले सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन डिलीवरी नहीं हुई। मजबूर होकर वह बीमार परिजनों को घर छोड़कर लाइन में खड़ी होने आई हैं। वहीं रेवाड़ी के राजवीर ने कहा कि वह पिछले दो दिनों से सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लग रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
शादी का सीजन होने के कारण पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम के कैटरर्स और मैरिज पैलेस संचालकों की परेशानी और बढ़ गई है। पानीपत में कई बैंकेट हॉल और मैरिज पैलेस में हलवाई अब लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर खाना बनाने को मजबूर हैं। शहर और आसपास करीब 50 से अधिक बड़े बैंकेट हॉल हैं, जहां रोजाना शादियां और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं और इन कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है।
पानीपत के प्रसिद्ध हलवाई बंटू ने बताया कि लगभग 500 मेहमानों वाली एक शादी में 15 से 20 कॉमर्शियल सिलेंडर लगते हैं। लेकिन हाल ही में एक बड़े ऑर्डर के दौरान उन्हें केवल 6 सिलेंडर ही मिल पाए। ऐसे में मजबूर होकर बाकी काम लकड़ी की आग पर करना पड़ा। उन्होंने बताया कि जो काम गैस भट्ठियों पर 4 घंटे में हो जाता था, वही काम अब पूरा दिन लगाकर करना पड़ रहा है। इसके अलावा लकड़ी के धुएं से आंखों और फेफड़ों पर भी असर पड़ता है।
हरियाणा के मशहूर मुरथल ढाबों में भी गैस संकट का असर साफ दिखाई देने लगा है। मुरथल ढाबा एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंजीत सिंह के अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ा है। कई ढाबों ने अब लकड़ी और कोयले की भट्ठियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जबकि कुछ ने इंडक्शन चूल्हे मंगवाकर वैकल्पिक व्यवस्था की है।
रेशम ढाबा के मैनेजर मंगत राम के अनुसार गैस की कमी के कारण उनके ढाबे में गैस का इस्तेमाल करीब 70 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। फिलहाल गैस का उपयोग सिर्फ तवे की रोटी और पराठे बनाने में किया जा रहा है, जबकि बाकी अधिकतर व्यंजन अब लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर तैयार किए जा रहे हैं।
ढाबों में पहले रेड और व्हाइट ग्रेवी, कढ़ाई पनीर, बटर मसाला, मिक्स वेज, दाल मखनी और येलो दाल जैसे कई व्यंजन गैस पर तैयार किए जाते थे। लेकिन अब इन सभी आइटम को चूल्हों और भट्ठियों पर पकाया जा रहा है। काम को सुचारू रखने के लिए कई ढाबों ने अतिरिक्त भट्ठियां भी लगा दी हैं, हालांकि एक भट्ठी को पूरी तरह गर्म होने में 30 से 40 मिनट का समय लगता है और खाना बनने में भी गैस की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है।
गैस संकट के बावजूद ढाबा संचालकों ने फिलहाल मेन्यू या खाने की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। उनका कहना है कि ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए सभी आइटम पहले की तरह ही तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि कई ढाबों ने इंडक्शन चूल्हों का विकल्प भी अपनाया है, लेकिन कॉमर्शियल बिजली दरें अधिक होने के कारण यह व्यवस्था भी महंगी साबित हो सकती है।
इस बीच हरियाणा को केंद्र सरकार की ओर से 8.76 लाख लीटर कैरोसीन ऑयल उपलब्ध कराया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल किया जा सके।
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