मकर संक्रांति और एकादशी का 23 साल बाद संयोग, जानें कैसे मिलेगा लाभ

मकर संक्रांति 2026 आज मनाई जा रही है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से उत्तरायण शुरू हुआ। स्नान, तिल और दान का विशेष धार्मिक महत्व।

मकर संक्रांति और एकादशी का 23 साल बाद संयोग, जानें कैसे मिलेगा लाभ
  • दुर्लभ संयोग में आज मकर संक्रांति, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
  • आज से उत्तरायण की शुरुआत, स्नान-दान और तिल का विशेष महत्व
  • 23 साल बाद मकर संक्रांति और एकादशी का विशेष योग बना


आज 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। शास्त्रों में इस संयोग को अत्यंत शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले नदी में स्नान करने या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस पर्व पर तिल का विशेष महत्व बताया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न तिल को गंगाजल के समान पवित्र माना गया है। धार्मिक विश्वास है कि तिल से किए गए दान और तिलांजलि से पितरों को शांति मिलती है और व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं।

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ और खिचड़ी का दान करना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिल और गुड़ का सेवन शरीर में गर्माहट लाता है और सूर्य व शुक्र ग्रह की कृपा से सुख-समृद्धि बढ़ती है।

इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व और भी खास है, क्योंकि 23 साल बाद एकादशी का संयोग बना है। इससे पहले ऐसा संयोग साल 2003 में देखा गया था। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व भिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, असम में माघ बिहू और उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व के रूप में मनाने की परंपरा है। वहीं गंगासागर में स्नान को इस दिन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।