145 करोड़ का बड़ा बैंक घोटाला… नगर निगम की 5 एफडी का कोई रिकॉर्ड नहीं… आखिर पैसा गया कहां?

पंचकूला में कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा में नगर निगम की 145 करोड़ रुपए की एफडी में घोटाला सामने आया है। 5 एफडी का रिकॉर्ड नहीं मिलने पर इकोनॉमिक्स विंग जांच कर रही है।

145 करोड़ का बड़ा बैंक घोटाला… नगर निगम की 5 एफडी का कोई रिकॉर्ड नहीं… आखिर पैसा गया कहां?

नगर निगम की 5 एफडी का बैंक रिकॉर्ड नहीं मिला, 145 करोड़ पर संकट
रिन्यूअल के फर्जी डॉक्यूमेंट से सालों तक छुपाया गया घोटाला
इकोनॉमिक्स विंग को सौंपी गई जांच, बैंक भी जांच के दायरे में



हरियाणा में सरकारी विभागों से जुड़े करोड़ों के घोटालों की कड़ी में अब पंचकूला से एक और बड़ा मामला सामने आया है। Kotak Mahindra Bank की सेक्टर-11 शाखा में नगर निगम की करीब 145 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम की 16 एफडी में से 5 एफडी का बैंक में कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

यह मामला पिछले 6 दिनों से दबा हुआ था, लेकिन अब खुलकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों में पहले से ही करीब 590 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच चल रही है, जिसमें चंडीगढ़ और मोहाली के दो बैंकों का नाम सामने आ चुका है। अब इस कड़ी में तीसरे बैंक के रूप में कोटक महिंद्रा बैंक भी जुड़ गया है।

जानकारी के अनुसार पंचकूला नगर निगम ने सेक्टर-11 स्थित इस बैंक शाखा में अपना खाता खुलवाया था और अपनी एफडी को State Bank of India से ट्रांसफर करवाया था। जब हाल ही में नगर निगम ने अपनी एफडी की मैच्योरिटी पर राशि वापस मांगी, तो बैंक ने जवाब दिया कि दिए गए नंबरों के अनुसार ऐसी कोई एफडी उनके रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है।

इस जवाब के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया और तुरंत एक जांच टीम का गठन किया गया, जिसमें अकाउंट अफसर, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर शामिल थे। टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की और सरकार व बैंक को भेजी। इसके बाद बैंक ने भी पंचकूला डीसीपी को शिकायत दी, जिसे अब इकोनॉमिक्स विंग को जांच के लिए सौंपा गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए गए। बैंक की ओर से हर बार एफडी के रिन्यूअल के फर्जी दस्तावेज नगर निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को शक नहीं हुआ। वहीं उसी आधार पर बैंक में दो अतिरिक्त खाते भी खोले गए और इन खातों से रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार इस घोटाले में बैंक से जुड़ी एक महिला के खाते में भी बड़ी राशि ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस पूरे मामले में नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हुई है, क्योंकि उन्होंने कभी एफडी की वास्तविक स्थिति की जांच नहीं की।

खुलासे के बाद एक और चौंकाने वाली बात सामने आई कि जब नगर निगम ने पैसा वापस मांगना शुरू किया, तो एक बैंक कर्मचारी निगम कार्यालय पहुंचा और ज्यादा ब्याज का लालच देकर एफडी दोबारा करवाने का प्रस्ताव देने लगा। हालांकि इस बार अधिकारी उसके झांसे में नहीं आए और यहीं से पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो गया। अब इस पूरे मामले की जांच इकोनॉमिक्स विंग द्वारा की जा रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।