1 अप्रैल से शुरू होगी देश की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना: इस बार जनगणना में पूछे जाएंगे 33 सवाल
देश में 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही जनगणना 2027 इस बार डिजिटल होगी, जिसमें 33 सवालों के जरिए घर, सुविधाओं, खाने और आर्थिक स्थिति की जानकारी ली जाएगी, जबकि जाति जनगणना दूसरे चरण में होगी।
■ 1 अप्रैल से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, दो चरणों में पूरी प्रक्रिया
■ घर, टॉयलेट, खाने से लेकर संसाधनों तक पूछे जाएंगे 33 सवाल
■ जाति जनगणना दूसरे चरण में, डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय
देशभर में 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही जनगणना 2027 इस बार कई बड़े बदलावों के साथ सामने आ रही है, जो इसे अब तक की सबसे व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत प्रक्रिया बनाती है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जिसमें नागरिकों की जीवनशैली, आवासीय स्थिति, संसाधन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े विस्तृत प्रश्न शामिल किए गए हैं। इस बार सरकार ने 33 अहम सवाल तय किए हैं, जो पहले चरण में पूछे जाएंगे और जिनमें घर की बनावट से लेकर उसमें उपलब्ध सुविधाओं तक हर पहलू को कवर किया जाएगा। दीवार, छत और फर्श की सामग्री, घर का उपयोग, परिवार के मुखिया की जानकारी, सामाजिक वर्ग, वैवाहिक स्थिति और सदस्यों की संख्या जैसे प्रश्न इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।
सबसे खास बात यह है कि इस बार नागरिकों को सेल्फ एन्यूमरेशन यानी खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा दी गई है, जिसके लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया जाएगा। इसके बावजूद अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे, जिससे डेटा की सटीकता सुनिश्चित हो सके। वहीं जनगणना में घर की सुविधाओं पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी, जिसमें पीने के पानी का स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति और प्रकार, गंदे पानी की निकासी और रसोई-गैस कनेक्शन जैसी जानकारी शामिल होगी।
इसके अलावा परिवार की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए यह भी पूछा जाएगा कि घर में टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, लैपटॉप, साइकिल, बाइक या कार जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। इतना ही नहीं, परिवार में मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज भी दर्ज किया जाएगा, जिससे देश के खाद्य पैटर्न का भी आंकलन किया जा सके।
जनगणना 2027 का दूसरा चरण और भी महत्वपूर्ण होगा, जिसमें लोगों की सामाजिक और आर्थिक जानकारी के साथ-साथ जाति जनगणना भी शामिल की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, जाति से जुड़े सवाल इसी चरण में पूछे जाएंगे और प्रश्न तैयार होने के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे।
एक दिलचस्प बदलाव यह भी किया गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े यदि खुद को स्थायी संबंध में मानते हैं, तो उन्हें इस बार विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। तकनीकी रूप से इस पूरी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए सी-डैक द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म और 16 भाषाओं में मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा, जबकि 19 भाषाओं में प्रशिक्षण सामग्री तैयार की गई है।
जनगणना की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होगी और इसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है। वहीं लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। लगभग 11,000 करोड़ रुपये के बजट वाली इस विशाल प्रक्रिया को केंद्र सरकार, राज्य प्रशासन और जिला स्तर के अधिकारियों के सहयोग से गृह मंत्रालय की निगरानी में पूरा किया जाएगा।
सबसे अहम पहलू यह है कि इस जनगणना में जुटाए गए सभी व्यक्तिगत आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। इन्हें न तो सूचना का अधिकार कानून के तहत साझा किया जाएगा, न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस तरह यह प्रक्रिया न केवल व्यापक और आधुनिक होगी, बल्कि नागरिकों की निजता को भी पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।
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