हरियाणा-नूंह में बिजली निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारी, किसान और इंजीनियर एकजुट

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव का HERC की जनसुनवाई में कर्मचारी संगठनों, इंजीनियरों, किसानों और इनेलो ने विरोध किया। अब आयोग के फैसले का इंतजार है।

हरियाणा-नूंह में बिजली निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारी, किसान और इंजीनियर एकजुट

गुरुग्राम-नूंह में बिजली निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारी, किसान और इंजीनियर एकजुट

HERC की जनसुनवाई में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का जोरदार विरोध

इंजीनियरों का दावा- गुरुग्राम और नूंह से हर महीने 777 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व


चंडीगढ़। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की जनसुनवाई में बिजली कर्मचारी संगठनों, पावर इंजीनियरों, किसान संगठनों और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध दर्ज कराया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने जनसुनवाई पूरी कर ली है और अब इस मामले में जल्द फैसला आने की संभावना है।

जनसुनवाई के साथ ही गुरुग्राम और नूंह की सभी बिजली डिवीजनों में कर्मचारियों ने करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि समानांतर वितरण लाइसेंस के नाम पर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की शुरुआत की जा रही है, जिसका व्यापक असर सरकारी बिजली व्यवस्था पर पड़ेगा।

जनसुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री और इनेलो नेता संपत सिंह ने भी प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार निजी कंपनियों को बिजली वितरण क्षेत्र में लाकर सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करना चाहती है। उनका कहना था कि किसी भी कीमत पर बिजली का निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और सुरेश राठी ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देना सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का हर स्तर पर विरोध जारी रहेगा।

जनसुनवाई में ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठन और अन्य सामाजिक संगठनों ने भी प्रस्ताव के खिलाफ अपना पक्ष रखा।

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने आयोग से आवेदन खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि आवेदनकर्ता कंपनी का गठन केवल एक वर्ष पहले हुआ है और उसकी चुकता पूंजी मात्र 1 करोड़ रुपये है। जबकि गुरुग्राम और नूंह से हर महीने करीब 777 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व प्राप्त होता है।

एसोसिएशन का कहना है कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए मजबूत नेटवर्क, सब-स्टेशन, प्रशिक्षित स्टाफ, SCADA सिस्टम और पर्याप्त वित्तीय क्षमता जरूरी होती है। उनका आरोप है कि आवेदनकर्ता कंपनी ने अपनी तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता का पर्याप्त प्रमाण आयोग के सामने प्रस्तुत नहीं किया है।

इंजीनियरों ने यह भी आशंका जताई कि गुरुग्राम और नूंह, डीएचबीवीएनएल के कुल राजस्व का लगभग 27.5 प्रतिशत योगदान देते हैं। यदि लाभकारी उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले गए तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होगी और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों के रूप में पड़ सकता है।

अब सभी की नजर HERC के अंतिम फैसले पर टिकी है, क्योंकि यह निर्णय हरियाणा की बिजली वितरण व्यवस्था और भविष्य की नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।