UAE, सऊदी, जॉर्डन में अमेरिकी THAAD डिफेंस-सिस्टम पर ईरानी हमला: जॉर्डन वाला तबाह, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान, अमेरिका के पास ऐसे चुनिंदा सिस्टम
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के हमले में जॉर्डन स्थित अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम के AN/TPY-2 रडार को भारी नुकसान होने की रिपोर्ट सामने आई है। सैटेलाइट तस्वीरों में तबाही के संकेत मिले हैं, जिससे अमेरिकी मिसाइल डिफेंस क्षमता पर असर पड़ सकता है।
■ ईरान के हमले में अमेरिकी THAAD सिस्टम को भारी नुकसान
■ जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर रडार साइट तबाह
■ सैटेलाइट तस्वीरों में गड्ढे और जला मलबा, अमेरिकी रक्षा को बड़ा झटका
■विस्तृत खबर
मध्य-पूर्व (वेस्ट एशिया) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बेहद अहम घटनाक्रम सामने आया है। सैटेलाइट इमेज और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने अमेरिका के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) को निशाना बनाकर बड़ा रणनीतिक नुकसान पहुंचाया है। यह हमला जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर तैनात THAAD बैटरी के मुख्य हिस्से पर किया गया, जिसमें AN/TPY-2 रडार पूरी तरह नष्ट हो गया बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला 1 या 2 मार्च 2026 के बीच हुआ माना जा रहा है। उस समय क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर था। सैटेलाइट तस्वीरों में रडार साइट पर दो बड़े गड्ढे और जला हुआ मलबा साफ दिखाई दे रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हमला बेहद सटीक और शक्तिशाली था। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस हमले में सिस्टम को हुए नुकसान की पुष्टि की है।
बताया जा रहा है कि जिस AN/TPY-2 रडार को निशाना बनाया गया, वह THAAD सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही रडार दूर से बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने का काम करता है। इसके नष्ट होने से उस पूरे क्षेत्र में मिसाइल ट्रैकिंग और एयर डिफेंस क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सिर्फ जॉर्डन ही नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब में भी ईरान द्वारा इसी तरह के हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक UAE के अल-रुवैस और अल-सदर एयरबेस के पास मौजूद THAAD शेल्टरों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि रडार सिस्टम सुरक्षित हैं या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है।
इसी तरह सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस के पास भी हमले की जानकारी मिली है। यहां THAAD से जुड़े रडार और सैन्य वाहनों के आसपास धुआं और मलबा देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि वहां भी सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा हो सकता है।
इस घटना का आर्थिक और रणनीतिक महत्व भी बेहद बड़ा है। एक पूरी THAAD बैटरी की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर यानी लगभग 8,400 करोड़ रुपये बताई जाती है। वहीं जिस AN/TPY-2 रडार को नष्ट किया गया, उसकी कीमत ही लगभग 300 से 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,500 से 4,200 करोड़ रुपये के बीच आंकी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूरे नेटवर्क और अन्य उपकरणों को हुए नुकसान को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा करीब 22,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
रणनीतिक दृष्टि से भी यह घटना बेहद अहम मानी जा रही है। दुनिया भर में अमेरिका के पास ऐसी केवल 8 THAAD बैटरियां ही मौजूद हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात हैं, जिनमें गुआम और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं। ऐसे में किसी एक बैटरी का भी निष्क्रिय होना अमेरिकी मिसाइल डिफेंस नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस रडार के नष्ट होने के बाद अब उस क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता काफी कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी सेना को पुराने Patriot (PAC-3) एयर डिफेंस सिस्टम पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक इन मिसाइलों का स्टॉक पहले से ही सीमित बताया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
Akhil Mahajan