बेटी वाले बयान पर रेणु भाटिया का इस्तीफा, नर्सों के विरोध के बीच छोड़ा पद
हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने विवादित बयान और नर्सिंग स्टाफ के विरोध के बाद मुख्यमंत्री को इस्तीफा भेज दिया है।
- बेटी वाले बयान पर हरियाणा महिला आयोग अध्यक्ष रेणु भाटिया ने दिया इस्तीफा
- नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल और विरोध के बीच देर रात मुख्यमंत्री को भेजा त्यागपत्र
- इस्तीफे में लिखा- महिलाओं के अधिकार और सम्मान की लड़ाई आगे भी लड़ती रहूंगी
हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने मंगलवार देर रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह फैसला उस बयान के बाद आया है, जिस पर पूरे दिन प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ ने विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की। रेणु भाटिया ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेज दिया है।
अपने त्यागपत्र में रेणु भाटिया ने लिखा कि उन्होंने पिछले साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ महिला आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार जताते हुए कहा कि वह भविष्य में भी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ती रहेंगी।
यह पूरा विवाद 7 जून को कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल के दौरे के दौरान दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ। अस्पताल में नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित मामले की जांच के लिए पहुंची रेणु भाटिया ने ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इसी दौरान उन्होंने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर अनिता से कहा था कि यदि आपकी बेटी होती तो क्या उसे किसी के साथ कमरे में छोड़ देतीं। इस टिप्पणी के बाद नर्सिंग स्टाफ में भारी नाराजगी फैल गई।
मंगलवार को हरियाणा के कई जिलों में नर्सिंग कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। पंचकूला, सोनीपत समेत कई स्थानों पर नर्सिंग स्टाफ अस्पताल परिसरों में धरने पर बैठ गया। हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि यदि रेणु भाटिया माफी नहीं मांगतीं या इस्तीफा नहीं देतीं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
नर्सिंग एसोसिएशन ने बुधवार तक हड़ताल जारी रखने और गुरुवार को पूरे दिन की हड़ताल की चेतावनी भी दी थी। हालांकि देर रात रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजर नर्सिंग संगठनों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
विवाद के केंद्र में रहीं सीनियर नर्सिंग ऑफिसर अनिता ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वह पिछले 20 वर्षों से सेवा दे रही हैं और घटना के दिन उनकी ड्यूटी केवल सुपरविजन की थी। उन्हें संबंधित मामले की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्ची उनके लिए भी बेटी समान है, लेकिन इस घटना में नर्सिंग स्टाफ की कोई भूमिका नहीं थी।
अनिता ने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1500 मरीजों की ओपीडी होती है और हर मरीज की जानकारी नर्सिंग स्टाफ के पास होना संभव नहीं है। उन्होंने रेणु भाटिया की टिप्पणी को दुखद बताते हुए कहा कि इससे पूरे नर्सिंग समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
रेणु भाटिया के इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। अब यह देखना होगा कि सरकार उनके इस्तीफे पर क्या फैसला लेती है और नर्सिंग संगठनों का आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।
Akhil Mahajan