हरियाणा में भवन नियमों का नया अध्याय – जानिए क्या हैं बड़ा बदलाव

हरियाणा सरकार ने भवन निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट थर्ड पार्टी विशेषज्ञ देंगे, पुराने उद्योग 150% और सामान्य उद्योग 200% तक निर्माण बढ़ा सकेंगे। नागरिक 28 नवंबर तक अपने सुझाव भेज सकते हैं।

हरियाणा में भवन नियमों का नया अध्याय – जानिए क्या हैं बड़ा बदलाव

हरियाणा सरकार ने भवन निर्माण नियमों में बड़ा संशोधन किया
अब ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट सरकारी दफ्तर नहीं, थर्ड पार्टी विशेषज्ञ देंगे
उद्योगों को 150 से 200 प्रतिशत तक निर्माण बढ़ाने की अनुमति, आम नागरिक दे सकेंगे सुझाव


हरियाणा सरकार ने राज्य में भवन निर्माण से जुड़े नियमों में बड़ा संशोधन किया है। अब किसी भी मकान, फैक्ट्री, होटल या मल्टीस्टोरी इमारत के लिए ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट यानी भवन के उपयोग या रहने की अनुमति सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि बाहरी विशेषज्ञ (थर्ड पार्टी) जारी करेंगे। यह कदम हरियाणा भवन संहिता, 2017 में किए गए संशोधन के तहत लागू किया गया है। इस नए प्रावधान से भवन मालिकों को अब फाइलों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो जाएगी।

सरकार के मुताबिक, अब सीनियर आर्किटेक्ट या अनुभवी इंजीनियर, जो राज्य सरकार की स्वीकृत सूची में शामिल होंगे, निर्माण स्थल पर जाकर निरीक्षण करेंगे। यदि भवन सभी निर्माण मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुरूप पाया गया तो विशेषज्ञ सीधे ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे। यह बदलाव खास तौर पर हाई रिस्क बिल्डिंग्स — जैसे होटल, मॉल, औद्योगिक इकाइयाँ और ऊंची इमारतें — के लिए लागू किया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विशेषज्ञ या मालिक गलत रिपोर्ट या भ्रामक जानकारी देगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें लाइसेंस रद्द करना, जुर्माना और भविष्य में प्रतिबंध शामिल होंगे। इस कदम का उद्देश्य भवन निर्माण प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाना है।

गरीब वर्ग को भी राहत
संशोधित नियमों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मकानों के लिए बाथरूम और शौचालय के न्यूनतम आकार तय कर दिए गए हैं, ताकि गरीब परिवारों को बेहतर बुनियादी सुविधाएँ मिल सकें। इसके अलावा, ग्रीन बिल्डिंग्स को अब पर्यावरण मंजूरी से छूट नहीं दी जाएगी। हर निर्माण परियोजना को अब पर्यावरण मानकों का पालन करना होगा।

उद्योगों और संस्थानों को मिली बड़ी राहत
पुराने उद्योग अब अपने प्लॉट में 150 प्रतिशत तक, जबकि सामान्य उद्योग 200 प्रतिशत तक निर्माण कार्य बढ़ा सकेंगे। इसी तरह, होटल, रिसॉर्ट और कॉलेजों को भी अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी गई है। औद्योगिक प्लॉट्स में 3 से 6 मीटर तक का सेटबैक (खाली स्थान) रखना अनिवार्य होगा, ताकि सुरक्षा और संरचनात्मक संतुलन बना रहे।

हर आवेदन अब ऑनलाइन प्रक्रिया से होगा और यदि 18 दिन के भीतर किसी फाइल की रिपोर्ट नहीं आती, तो वह स्वतः विभाग के पास भेज दी जाएगी। सरकार ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस संशोधन पर अपने सुझाव 28 नवंबर तक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ईमेल पर भेज सकते हैं।