अब ट्रांसजेंडर भी बन सकेंगे HCS अधिकारी: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एचपीएससी ने आवेदन फॉर्म में जोड़ा तीसरे लिंग का विकल्प

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग ने HCS भर्ती आवेदन फॉर्म में ट्रांसजेंडर विकल्प जोड़ा। अब ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी भी हरियाणा सिविल सेवा और अन्य सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन कर सकेंगे।

अब ट्रांसजेंडर भी बन सकेंगे HCS अधिकारी: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एचपीएससी ने आवेदन फॉर्म में जोड़ा तीसरे लिंग का विकल्प

हरियाणा सिविल सर्विस भर्ती में ट्रांसजेंडर को मिला आवेदन का अधिकार
एचपीएससी ने जेंडर कॉलम में जोड़ा तीसरे लिंग का विकल्प
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद बड़ा फैसला


हरियाणा सिविल सर्विस (HCS) भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए ट्रांसजेंडर समुदाय को भी आवेदन का अधिकार दे दिया गया है। अब हरियाणा लोक सेवा आयोग के आवेदन फॉर्म में लिंग चयन वाले कॉलम में ट्रांसजेंडर का विकल्प भी उपलब्ध होगा। यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद लागू किया गया है, जिससे सरकारी नौकरियों में समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।

जानकारी के अनुसार Haryana Public Service Commission ने 23 फरवरी को अपनी वेबसाइट को करीब एक घंटे के लिए बंद रखा था। इस दौरान तकनीकी अपडेट कर आवेदन फॉर्म में तीसरे लिंग का कॉलम जोड़ा गया। अब उम्मीदवार पुरुष और महिला के साथ-साथ ट्रांसजेंडर विकल्प भी चुन सकेंगे।

इससे पहले आवेदन फॉर्म में केवल दो ही विकल्प उपलब्ध थे, जिससे ट्रांसजेंडर समुदाय के अभ्यर्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। मामले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए Punjab and Haryana High Court ने हरियाणा सरकार और संबंधित आयोगों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सरकारी भर्तियों में तीसरे लिंग को शामिल किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि समानता का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं में भी दिखना चाहिए।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब ट्रांसजेंडर व्यक्ति हरियाणा सिविल सेवा और अन्य सरकारी पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे प्रशासनिक सेवाओं में समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय से समान अवसर की मांग कर रहे समुदाय को राहत मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी एक बड़ा बदलाव है, जो राज्य में रोजगार के अवसरों को अधिक समावेशी बनाएगा।