पंचकूला AJL जमीन आवंटन केस में हुड्डा को राहत: हाईकोर्ट ने CBI कोर्ट का आरोप तय करने का आदेश रद्द किया
पंचकूला AJL जमीन आवंटन मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राहत देते हुए CBI कोर्ट के आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में आपराधिक अपराध साबित नहीं होता।
■ CBI कोर्ट का आरोप तय करने का आदेश रद्द
■ हाईकोर्ट ने कहा- केस में अपराध साबित नहीं
■ AJL को 2005 में दोबारा आवंटन बना था विवाद का कारण
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बहुचर्चित पंचकूला AJL जमीन आवंटन केस में बड़ी राहत मिली है। पंजाब एंड चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने CBI कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से कोई आपराधिक अपराध साबित नहीं होता है। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जांच एजेंसी के पास जमीन आवंटन को अवैध घोषित करने का कानूनी अधिकार नहीं है। इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मामले में राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
यह मामला पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित करीब 3,360 वर्ग मीटर सरकारी भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। इस केस में CBI ने हुड्डा सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया था। आरोप था कि वर्ष 2005 में कांग्रेस सरकार के दौरान इस भूखंड को नियमों की अनदेखी करते हुए एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) को दोबारा आवंटित किया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में CBI कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से आपराधिक मंशा या भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आता।
पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो वर्ष 1982 में पंचकूला में यह जमीन एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड को आवंटित की गई थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और भजन लाल मुख्यमंत्री थे। AJL में उस दौर के कई कांग्रेस नेता पदाधिकारी थे, जिनमें मोतीलाल बोरा चेयरमैन थे।
बाद में वर्ष 1992 में सरकार ने यह प्लॉट यह कहते हुए रिज्यूम कर लिया कि छह महीने में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया और लगभग दस वर्षों तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उस समय मुख्यमंत्री बंसी लाल थे। उनकी सरकार गिरने के बाद 2000 में ओमप्रकाश चौटाला की सरकार बनी।
वर्ष 2005 में हरियाणा में कांग्रेस की वापसी के बाद मुख्यमंत्री के रूप में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस प्लॉट को दोबारा AJL को आवंटित कर दिया। आरोप था कि इसे पुराने रेट पर और समान माप के साथ पुनः दिया गया, जिससे नियमों की अनदेखी हुई। इसी पुनः आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हुआ और शिकायतें दर्ज कराई गईं।
5 मई 2016 को भाजपा सरकार के दौरान हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में FIR दर्ज की। 4 अप्रैल 2017 को जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी गई। CBI ने 27 जनवरी 2017 को केस दर्ज कर 1 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दायर की। वर्ष 2021 से 2025 तक इस मामले की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा रखा था। अब अंतिम सुनवाई में हाईकोर्ट ने CBI कोर्ट का आरोप तय करने का आदेश रद्द कर दिया।
विजिलेंस ने हुड्डा के अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के चार वरिष्ठ अधिकारियों को भी आरोपी बनाया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी इसी FIR के आधार पर संज्ञान लिया। आरोप था कि पुनः आवंटन में अनियमितता बरती गई। हालांकि हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने फिलहाल इस केस में हुड्डा को बड़ी कानूनी राहत दे दी है।
Akhil Mahajan