आरएलडी हरियाणा में तैयार करेगी नई जमीन, छिकारा बने जयंत के चाणक्य
नए प्रदेशाध्यक्ष की सुगबुगाहट व मच्छरौली की ज्वाइनिंग के बीच प्रदेश अध्यक्ष ने छोडी पार्टी-हरियाणा प्रदेश महासचिव नरेंद्र छिकारा ने पार्टी के विस्तार की बिछाई बिसात
- आरएलडी हरियाणा में तैयार करेगी नई जमीन, हरियाणा के प्रदेश संगठन महासचिव छिकारा बने जयंत के चाणक्य
- नए प्रदेशाध्यक्ष की सुगबुगाहट व मच्छरौली की ज्वाइनिंग के बीच प्रदेश अध्यक्ष ने छोडी पार्टी
आरएलडी हरियाणा में नई सियासी जमीन तैयार कर रही है। हरियाणा के प्रदेश संगठन महासचिव नरेंद्र छिकारा ने पार्टी के विस्तार की नई बिसात बिछाई है। वह जयंत के चाणक्य बने हैं। हरियाणा में राष्ट्रीय लोक दल ने एक बार फिर संगठनात्मक सर्जरी की तैयारी शुरू कर दी है।
लंबे समय से निष्क्रिय पड़े पार्टी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की जिम्मेदारी अब प्रदेश संगठन महासचिव नरेंद्र छिकारा के कंधों पर है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने हरियाणा को लेकर अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है और उसी का नतीजा है कि संगठन की बागडोर अब सीधे छिकारा के हाथों में सौंपी गई है।
सूत्र बताते हैं कि हरियाणा में आरएलडी का संगठन पिछले कुछ समय से कागजों तक सीमित होकर रह गया था। जिलों में न तो सक्रिय कार्यक्रम हो रहे थे और न ही नए नेताओं को जोड़ने की ठोस पहल दिखाई दे रही थी। इसी पृष्ठभूमि में जयंत चौधरी ने संगठन की समीक्षा की और नरेंद्र छिकारा को फील्ड में उतरकर काम करने का स्पष्ट संदेश दिया।
इस फैसले के बाद पहला बड़ा कदम पानीपत में आयोजित कार्यक्रम के रूप में सामने आया। दिलचस्प बात यह रही कि इस कार्यक्रम की सूचना वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और पुराने पदाधिकारियों को नहीं दी गई। इसे संगठन में बदलाव का साफ संकेत माना गया। इसी दौरान समालखा से पूर्व विधायक रविंद्र मच्छरौली से संपर्क साधा गया और सूत्रों के अनुसार, मुलाकात में ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की रणनीति पर सहमति बन गई थी।
जब यह अंदरूनी हलचल मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची, तो संगठन में असंतोष खुलकर सामने आ गया। परिणामस्वरूप प्रदेश अध्यक्ष ने पद छोड़ दिया और उनके साथ ही करीब 40 नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया। यह घटनाक्रम आरएलडी के लिए झटका जरूर माना जा रहा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इसे पुराने ढांचे के टूटने और नए संगठन के निर्माण की शुरुआत के तौर पर देख रहा है।
सियासी जानकारों की मानें तो जयंत चौधरी हरियाणा में अब चेहरे नहीं, संगठन पर दांव खेलना चाहते हैं। नरेंद्र छिकारा को इसी रणनीति का केंद्र बनाया गया है। आने वाले दिनों में नए सामाजिक और क्षेत्रीय नेताओं को जोड़ने, पुराने समीकरणों को साधने और पार्टी को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की योजना पर काम होगा।
चौधरी चरण सिंह की विरासत को आधार बनाकर जयंत चौधरी हरियाणा में आरएलडी की खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने की कोशिश में जुट गए हैं। इस पूरी कवायद में नरेंद्र छिकारा को जयंत का चाणक्य माना जा रहा है, जिनके जरिए पार्टी हरियाणा में नई राजनीतिक लकीर खींचने की तैयारी कर रही है।
Akhil Mahajan