खेल मंत्री की तिरंगा यात्रा में बिगड़ी बच्चों की तबीयत, कई गश खाकर गिरे; 7 बजे की जगह 10 बजे शुरू हुई यात्रा
पलवल में खेल मंत्री गौरव गौतम की तिरंगा यात्रा के दौरान कई स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ी। उल्टियां और बेहोशी के बाद व्यवस्थाओं पर सवाल उठे।
➤ तिरंगा यात्रा में कई बच्चों को उल्टियां हुईं, कुछ छात्र चक्कर खाकर सड़क पर गिरे
➤ भारी भीड़, गर्मी और अव्यवस्था के बीच शिक्षकों ने बच्चों को संभाला, पानी पिलाया
➤ 7 बजे की जगह 10 बजे शुरू हुई यात्रा, मेडिकल इंतजामों को लेकर उठे सवाल
हरियाणा के पलवल में भाजपा की तिरंगा यात्रा के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रा में शामिल कई स्कूली बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। राज्य के खेल मंत्री गौरव गौतम की मौजूदगी में निकाली जा रही यात्रा में भारी भीड़ के बीच कई बच्चों को उल्टियां होने लगीं, जबकि कुछ छात्र चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़े। बच्चों की हालत बिगड़ते देख वहां मौजूद शिक्षकों और अभिभावकों में हड़कंप मच गया। शिक्षकों ने तुरंत बच्चों को संभाला और उन्हें प्राथमिक उपचार दिलाया। यात्रा के आयोजन को लेकर यह बात भी सामने आई कि इसे सुबह 7 बजे के बजाय 10 बजे शुरू किया गया, जिसके बाद गर्मी और भीड़ के बीच बच्चों की परेशानी बढ़ने की बात कही गई।
यात्रा में क्षेत्र के कई सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों को शामिल किया गया था। देशभक्ति की भावना से जुड़े इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, प्रशासनिक अधिकारी और आम लोग भी मौजूद थे। खेल मंत्री गौरव गौतम यात्रा में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। शुरुआत में माहौल उत्साहपूर्ण था, लेकिन यात्रा आगे बढ़ने के साथ कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।
कई बच्चों को हुईं उल्टियां, कुछ सड़क पर गिरे
चश्मदीदों के मुताबिक, यात्रा के दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। इसी दौरान बच्चों को घुटन और परेशानी महसूस होने लगी। कतार में चल रहे कुछ बच्चों का जी मिचलाने लगा और उन्हें उल्टियां होने लगीं। इसके बाद कुछ अन्य छात्र चक्कर खाकर सड़क पर गिर गए।
बच्चों को इस हालत में देखकर यात्रा में शामिल शिक्षकों ने तत्काल मोर्चा संभाला। बेहोश हो रहे बच्चों को उठाकर सड़क किनारे छायादार जगहों पर ले जाया गया। शिक्षकों और साथ चल रहे छात्रों ने पानी की बोतलों से बच्चों के चेहरे पर पानी के छींटे मारे और उन्हें पानी पिलाया।
शिक्षकों और साथियों ने संभाला मोर्चा
अचानक बच्चों की तबीयत खराब होने के बाद शिक्षकों ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। कुछ बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। उनके चेहरे पर पानी डाला गया और पानी पिलाकर राहत देने की कोशिश की गई।
अभिभावकों ने भी बच्चों को संभाला। उन्होंने बच्चों को शांत कराया और उन्हें हवा देने की कोशिश की। कुछ समय बाद कई बच्चों की हालत में सुधार होने लगा।
यात्रा में बच्चों के बीमार पड़ने की तस्वीरों में भी शिक्षक और छात्र प्रभावित बच्चों को संभालते तथा उनके चेहरे पर पानी डालते नजर आए।
7 बजे की जगह 10 बजे शुरू हुई यात्रा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यात्रा के समय को लेकर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार यात्रा को सुबह 7 बजे शुरू होना था, लेकिन यह 10 बजे शुरू हुई। ऐसे में यात्रा के दौरान बच्चों को गर्मी और भारी भीड़ के बीच चलना पड़ा।
बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को शामिल किए जाने के बावजूद आयोजन के दौरान उन्हें किन परिस्थितियों में चलाया गया और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासनिक इंतजामों पर उठे सवाल
बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद मौके पर मौजूद अभिभावकों और आम लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। लोगों का कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को किसी यात्रा में शामिल किया गया था, तो वहां पर्याप्त संख्या में मेडिकल टीमें, एंबुलेंस और पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे।
लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए थी। यात्रा के दौरान कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने से साफ हुआ कि आयोजन स्थल पर बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाओं की जरूरत थी।
गनीमत रही समय रहते संभल गए बच्चे
बच्चों के गश खाकर गिरने और उल्टियां होने के बाद शिक्षकों और साथियों ने जिस तरह तत्काल उन्हें संभाला, उससे स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सका। बच्चों को छायादार जगह पर ले जाकर पानी दिया गया और हवा की गई।
अभिभावकों का कहना है कि अगर समय रहते बच्चों को नहीं संभाला जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार बच्चों को संभालने के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।
यह घटना अब तिरंगा यात्रा की व्यवस्था और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को शामिल करने वाले आयोजन में मेडिकल सुविधा, पानी, छाया और भीड़ नियंत्रण जैसे इंतजामों को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
Akhil Mahajan