भाजपा पर MDU की जमीन हड़पने का आरोप:इनसो के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष का चीफ जस्टिस से आग्रह; छात्रों में नाराजगी
रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी की 22 एकड़ जमीन पर कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने के प्रस्ताव को लेकर विवाद बढ़ गया है। इनसो के पूर्व अध्यक्ष ने CJI से हस्तक्षेप की मांग की है।
➤ MDU की 22 एकड़ जमीन पर विवाद
➤ इनसो के पूर्व अध्यक्ष ने CJI से हस्तक्षेप का आग्रह
➤ कोर्ट कॉम्प्लेक्स प्रस्ताव पर छात्र संगठनों में नाराजगी
रोहतक। हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी की करीब 22 एकड़ जमीन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि प्रदेश की भाजपा सरकार इस जमीन को लेकर उसमें न्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी कर चुकी है। इस प्रस्ताव को लेकर यूनिवर्सिटी के छात्रों, कर्मचारियों और आम लोगों में असंतोष पनपता दिखाई दे रहा है। कैंपस में इस मुद्दे को लेकर छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है और विरोध प्रदर्शन भी सामने आए हैं।
सबसे अहम पहलू यह है कि इनसो के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और छात्र नेता डॉ. प्रदीप देशवाल ने देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत का एमडीयू से पुराना संबंध रहा है और आज वे न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं। ऐसे में छात्रों को उम्मीद है कि उनके हस्तक्षेप से यूनिवर्सिटी की जमीन को सुरक्षित रखा जा सकेगा, ताकि भविष्य में कैंपस विस्तार और नए विभागों की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध रह सके।
डॉ. देशवाल का आरोप है कि भाजपा सरकार की नजर इस बेशकीमती जमीन पर पहले से रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कभी गोशाला और कभी कोरोना काल में श्मशान घाट बनाने के प्रस्ताव के जरिए जमीन लेने की कोशिश की गई थी, लेकिन छात्रों के आंदोलन के कारण वे प्रयास सफल नहीं हो सके। अब सरकार कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव लेकर आई है, जिसे उन्होंने शिक्षण संस्थान के हितों के विपरीत बताया।
उन्होंने कहा कि सरकारों का दायित्व शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाना होता है, न कि उनकी जमीन का अधिग्रहण करना। आने वाले समय में एमडीयू को नए विभाग खोलने, अनुसंधान केंद्र स्थापित करने और छात्र सुविधाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में 22 एकड़ जमीन का हस्तांतरण यूनिवर्सिटी के दीर्घकालिक विकास पर असर डाल सकता है।
डॉ. देशवाल ने चेतावनी दी कि 22 एकड़ जमीन तो दूर, एमडीयू की एक इंच जमीन भी नहीं लेने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले भी इस मुद्दे पर लंबा आंदोलन किया गया और मुकदमे झेले गए हैं। यदि जरूरत पड़ी तो आगे भी छात्र संगठन आंदोलन के लिए तैयार हैं। फिलहाल इस मामले ने कैंपस की राजनीति और प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।
Akhil Mahajan