नशे का केस दबाने के नाम पर 5 लाख की डील: 50 हजार लेते बिचौलिया गिरफ्तार, SHO से पूछताछ के बाद रिहा
फतेहाबाद के टोहाना में नशे का केस दबाने के नाम पर 5 लाख की कथित डील में 50 हजार लेते बिचौलिया गिरफ्तार हुआ। SHO से पूछताछ के बाद सबूत न मिलने पर रिहा किया गया।
➤ एनडीपीएस केस से नाम हटाने के नाम पर 5 लाख रुपये की कथित डील, 50 हजार रुपये लेते बिचौलिया गिरफ्तार
➤ करनाल एसीबी ने केमिकल लगे नोटों के साथ किरपाल को रंगे हाथों पकड़ा
➤ बिचौलिए ने SHO कुलदीप सिंह का नाम लिया, देर रात तक पूछताछ के बाद सबूत न मिलने पर रिहा
फतेहाबाद। नशे के एक मामले को रफा-दफा कराने के नाम पर कथित तौर पर 5 लाख रुपये की डील और 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते बिचौलिए की गिरफ्तारी से फतेहाबाद के टोहाना में हड़कंप मच गया। करनाल एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए बिचौलिए किरपाल को 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि यह रकम एनडीपीएस केस में नाम हटवाने के लिए तय हुई कथित डील की शेष रकम थी।
बिचौलिए ने पूछताछ के दौरान टोहाना शहर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह का नाम लिया। इसके बाद एसीबी की टीम ने एसएचओ को भी तलब किया और उनके कार्यालय तथा सरकारी गाड़ी की तलाशी ली। एसएचओ से देर रात तक पूछताछ की गई। हालांकि, प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने या लेने से जुड़ा कोई ठोस सबूत नहीं मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया। एसीबी अब बिचौलिए से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उसने एसएचओ का नाम किस आधार पर लिया और कथित 5 लाख रुपये की डील में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
7 ग्राम हेरोइन के मामले से शुरू हुई पूरी कहानी
मामला 11 दिसंबर 2025 का है। उस समय टोहाना पुलिस ने बिठमड़ा निवासी जगजीत सिंह को 7 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। इसके बाद उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता जगजीत सिंह के अनुसार, इसी मामले में अपना नाम हटवाने और केस को निपटाने के नाम पर किरपाल नामक बिचौलिए ने उससे 5 लाख रुपये की डील की थी। शिकायत के मुताबिक, इस कथित डील में से साढ़े चार लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे, जबकि बाकी 50 हजार रुपये शुक्रवार को दिए जाने थे।
यहीं से एसीबी ने पूरे मामले में जाल बिछाने की तैयारी शुरू की।
केमिकल लगे नोट लेकर पहुंचा शिकायतकर्ता, पैसे लेते ही दबोचा
जगजीत सिंह की शिकायत के आधार पर करनाल एसीबी की टीम ने कार्रवाई की। करनाल यूनिट के इंचार्ज अरविंद कुमार के नेतृत्व में टीम ने ट्रैप तैयार किया।
शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट दिए गए और तय योजना के मुताबिक 50 हजार रुपये बिचौलिए को देने के लिए भेजा गया। जैसे ही किरपाल ने रकम ली, एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया।
इस कार्रवाई के बाद एसीबी ने बिचौलिए को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि वह यह रकम SHO कुलदीप सिंह के नाम पर ले रहा था। इसी बयान के बाद जांच का दायरा बढ़ गया।
बिचौलिए के बयान के बाद SHO तक पहुंची एसीबी
बिचौलिए द्वारा एसएचओ का नाम लिए जाने के बाद एसीबी की टीम ने टोहाना शहर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह को तलब किया।
टीम ने उनके कार्यालय की तलाशी ली। इसके साथ ही सरकारी गाड़ी की भी जांच की गई। इसके बाद एसएचओ, बिचौलिए और शिकायतकर्ता को फतेहाबाद स्थित एसीबी कार्यालय लाया गया।
इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही जिले के कई अन्य एसएचओ और चौकी प्रभारी भी एसीबी कार्यालय पहुंच गए। देर रात तक वहां पूछताछ का दौर चलता रहा।
रात करीब एक बजे तक हुई पूछताछ, फिर SHO को छोड़ा
एसएचओ कुलदीप सिंह से देर रात तक एसीबी अधिकारियों ने सवाल-जवाब किए। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या रिश्वत की कथित डील में उनकी कोई भूमिका थी और क्या बिचौलिया वास्तव में उनके नाम पर रकम ले रहा था।
करीब रात एक बजे तक पूछताछ चलने के बाद प्रारंभिक स्तर पर एसएचओ के खिलाफ रिश्वत मांगने या लेने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
हालांकि, इससे मामले की जांच खत्म नहीं हुई है। एसीबी की जांच में बिचौलिए की भूमिका और उसके द्वारा लिए गए पैसे के संबंध में आगे की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
एसीबी बोली- शिकायत के आधार पर बिछाया था जाल
एसीबी टीम के इंचार्ज अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि एनडीपीएस केस को निपटाने की एवज में एसएचओ किसी मीडिएटर के जरिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीम ने शिकायत की जांच के बाद कार्रवाई की और बिचौलिए को 50 हजार रुपये के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि बिचौलिए ने एसएचओ का नाम क्यों लिया और क्या कथित 5 लाख रुपये की डील के पीछे कोई अन्य व्यक्ति या माध्यम भी शामिल था।
अब बिचौलिए से पूछताछ में खुलेंगे कई राज
एसीबी फिलहाल बिचौलिए से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर साढ़े चार लाख रुपये पहले किसे दिए गए, रकम देने का माध्यम क्या था और शेष 50 हजार रुपये लेने के लिए किरपाल की भूमिका क्या थी।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि SHO कुलदीप सिंह का नाम बिचौलिए ने किस आधार पर लिया। फिलहाल प्रारंभिक जांच में ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण एसएचओ को रिहा किया गया है, जबकि मामले की जांच आगे जारी है।
नशे के केस को निपटाने के नाम पर हुई कथित 5 लाख रुपये की डील और एसीबी के ट्रैप ने टोहाना पुलिस व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ ही यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में बिचौलिए तक ही रिश्वत की कहानी सीमित थी या इसके पीछे कोई और कड़ी भी जुड़ी हुई है।
Akhil Mahajan