इकलौते बेटे की मौत के बाद जन्मदिन की जगह शोकसभा मनाने को मजबूर हुआ परिवार

गुरुग्राम के इवेंट मैनेजर सार्थक मट्टू की थार हादसे में मौत के बाद पिता ने गंभीर आरोप लगाए। परिवार ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

इकलौते बेटे की मौत के बाद जन्मदिन की जगह शोकसभा मनाने को मजबूर हुआ परिवार

इकलौते बेटे की मौत के बाद जन्मदिन की जगह शोकसभा मनाने को मजबूर हुआ परिवार

पिता का आरोप, थार चालक ने पहले बाइक को टक्कर मारी फिर बेटे के ऊपर चढ़ा दी गाड़ी

दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, परिजनों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई

गुरुग्राम के रिजवुड सोसाइटी निवासी सार्थक मट्टू की सड़क हादसे में मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। जिस दिन बेटे का 34वां जन्मदिन मनाया जाना था, उसी दिन घर में शोकसभा आयोजित करनी पड़ी। पिता सुरेंद्र मट्टू ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने बेटे की सुरक्षा के लिए महंगा हेलमेट खरीदा था, लेकिन वह भी उसकी जान नहीं बचा सका।

परिजनों के अनुसार, 25 जून की सुबह सार्थक अपनी बाइक से ऑफिस के काम के लिए नोएडा जा रहे थे। इसी दौरान दिल्ली के रजोकरी फ्लाईओवर पर एक काले रंग की थार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। परिवार का आरोप है कि टक्कर मारने के बाद चालक ने वाहन उनके ऊपर चढ़ा दिया और मौके से निकल गया।

सार्थक एक निजी कंपनी में इवेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। हादसे के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता का कहना है कि यदि बेटे को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

दिल्ली पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि हादसे में शामिल थार बेंगलुरु की एक निजी कंपनी के नाम पर पंजीकृत है। कंपनी ने यह वाहन बिहार निवासी सागर साहा को लीज पर दिया था। पूछताछ में सागर ने बताया कि हादसे के समय वाहन उसका मित्र अपूर्व सिंह, निवासी गाजियाबाद, चला रहा था।

सार्थक के पिता सुरेंद्र मट्टू ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपियों का एल्कोहल टेस्ट हादसे के लगभग 40 घंटे बाद कराया। उनका कहना है कि इतनी देर बाद जांच कराने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने इस घटना को केवल सड़क हादसा नहीं बल्कि हत्या करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में शुरुआती गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण होता है। घटनास्थल से अस्पताल की दूरी महज 10 मिनट थी, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने से बेटे की जान चली गई। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद परिवार को कई घंटे तक अस्पताल और थाने के चक्कर लगाने पड़े।

भावुक पिता ने कहा कि उनका एक ही बेटा था और उसका जन्मदिन 27 जून को था, लेकिन परिवार को जश्न की जगह शोकसभा करनी पड़ी। उन्होंने मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें केवल न्याय चाहिए।