महेंद्रगढ़ में 114 साल बाद फिर शुरू होगा प्राचीन गुरुकुल
महेंद्रगढ़ के नांगल माला गांव में 114 साल पुराने दंडी स्वामी बलभद्र आश्रम और गुरुकुल का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। यहां फिर वेद अध्ययन और संस्कृत शिक्षा शुरू होगी।
महेंद्रगढ़ के 114 साल पुराने गुरुकुल और आश्रम का पुनर्निर्माण शुरू
नांगल माला की पहाड़ी पर फिर गूंजेगा वेद अध्ययन और संस्कृत शिक्षा
ग्रामीणों, संत समाज और श्रद्धालुओं के सहयोग से पुनर्जीवित हो रही ऐतिहासिक धरोहर
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में स्थित 114 साल पुराने दंडी स्वामी बलभद्र आश्रम एवं संस्कृत पाठशाला को एक बार फिर जीवंत बनाने की पहल शुरू हो गई है। जिले के नांगल माला गांव की पहाड़ी पर बने इस ऐतिहासिक गुरुकुल और आश्रम के पुनर्निर्माण का कार्य ग्रामीणों, संत समाज और श्रद्धालुओं के सहयोग से शुरू किया गया है।
करीब 114 वर्ष पहले स्थापित यह आश्रम एक समय वेद शिक्षा और संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहां दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते थे। अब वर्षों बाद इस ऐतिहासिक धरोहर को फिर से विकसित कर वेद अध्ययन और भारतीय संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1912 में दंडी स्वामी बलभद्र महाराज ने काशी में वेद अध्ययन पूरा करने के बाद नांगल माला गांव की पहाड़ी पर साधना करते हुए गुरुकुल की स्थापना की थी। यहां संस्कृत पाठशाला, आश्रम और गोसेवा केंद्र संचालित किए जाते थे। आश्रम परिसर में बनी कुटिया, रसोई और विशाल जाल का पेड़ आज भी मौजूद हैं। इसी पेड़ के नीचे बैठकर शिष्य वेदों का अध्ययन किया करते थे।
इस गुरुकुल में केवल हरियाणा ही नहीं बल्कि राजस्थान के कई क्षेत्रों से भी विद्यार्थी पहुंचते थे। महेंद्रगढ़, सतनाली, दादरी, भिवानी के अलावा राजस्थान के चिड़ावा और झुंझुनूं से लोग यहां आध्यात्मिक शिक्षा और वेद ज्ञान लेने आते थे।
बताया गया कि वर्ष 1957 में दंडी स्वामी बलभद्र महाराज के वैकुंठ गमन के बाद गुरुकुल धीरे-धीरे बंद हो गया। बाद में 1958 में इस पाठशाला को गांव के वर्तमान सरकारी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
अब संत समाज के प्रयासों से इस आश्रम के पुनरुद्धार का कार्य दोबारा शुरू किया गया है। इस कार्य में स्वामी कृष्णस्वरूप ब्रह्मचारी और श्यामस्वरूप ब्रह्मचारी विशेष भूमिका निभा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में पहाड़ी पर स्थित प्राचीन कुटिया को दोबारा व्यवस्थित किया गया है और नई कुटिया का निर्माण भी जारी है।
पहाड़ी पर लगभग एक एकड़ से अधिक समतल भूमि गुरुकुल के नाम दर्ज है। यहां तक पहुंचने के लिए मशीनों से नया रास्ता भी बनाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों को आने-जाने में सुविधा हो सके।
हाल ही में यहां आठ दिवसीय रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन भी किया गया। इसके साथ ही प्राचीन गुफा की साफ-सफाई करवाई गई, जहां दंडी स्वामी महाराज तपस्या किया करते थे। मान्यता है कि उन्हें इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हुए थे।
आश्रम परिसर में बने प्राचीन पत्थर के तालाब को भी पुनर्जीवित किया जा रहा है। यह तालाब गांव की जलापूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसके संरक्षण और पुनर्निर्माण के लिए विशेष कार्य कराए जा रहे हैं।
डिगरोता के सरपंच प्रतिनिधि डॉ. अभिषेक ने बताया कि गांववासियों और संत समाज के सहयोग से इस ऐतिहासिक धरोहर को दोबारा स्थापित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय संस्कृति, वेद शिक्षा और संत परंपरा से जुड़ सकें
pooja