अग्निवीर शंकर को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, राजपूत राइफल ने दी सलामी
महेंद्रगढ़ के अग्निवीर शंकर का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रारंभिक जांच में सर्विस पिस्तौल साफ करते समय गोली चलने से मौत की बात सामने आई। परिवार पर एक माह में दूसरा बड़ा दुख टूटा।
महेंद्रगढ़ के अग्निवीर शंकर का सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव में अंतिम संस्कार हुआ
प्रारंभिक जांच में सर्विस पिस्तौल साफ करते समय गोली चलने से मौत की बात सामने आई
एक माह पहले पत्नी का निधन हुआ था, अब परिवार पर टूटा दूसरा बड़ा दुख
महेंद्रगढ़। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के गांव सोहड़ी निवासी अग्निवीर शंकर का सोमवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका पार्थिव शरीर जैसे ही पैतृक गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। गमगीन माहौल में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। राजपूत राइफल की टुकड़ी ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
शंकर की तैनाती जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के मंजाकोट थाना क्षेत्र स्थित तरकुंडी गली में थी। बीते शनिवार को यूनिट क्षेत्र में अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर अन्य जवान मौके पर पहुंचे। वहां शंकर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले। उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही सेना के वरिष्ठ अधिकारी और मंजाकोट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और सेना ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद रविवार शाम पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।
परिजनों के अनुसार शंकर अपनी सर्विस पिस्तौल की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक गोली चल गई, जो उन्हें लग गई। प्रारंभिक जांच में भी यही तथ्य सामने आया है। हालांकि पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।
सोमवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचने पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने "भारत माता की जय" और "शंकर अमर रहे" के नारे लगाए। पूरे गांव में शोक का माहौल रहा। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार शंकर की सेवा अवधि में अभी करीब 16 महीने शेष थे। उनके पिता दीप सिंह भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बेटे का पार्थिव शरीर लेने के लिए वे स्वयं राजौरी गए थे। शंकर अपने पीछे माता-पिता, एक भाई और दो बहनों को छोड़ गए हैं।
परिवार पर दुखों का पहाड़ इसलिए भी टूट पड़ा क्योंकि शंकर की पत्नी का करीब एक माह पहले ही निधन हो गया था। लगातार दो बड़े हादसों ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं गांव में भी शोक की लहर बनी हुई है।
pooja