NEET-PG कट-ऑफ घटाने पर सुप्रीम कोर्ट में PIL, हरि शरण देवगन समेत डॉक्टरों ने दी NBEMS को चुनौती

NEET-PG 2025 के कट-ऑफ को शून्य और निगेटिव तक घटाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL, मेडिकल शिक्षा और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल।

NEET-PG कट-ऑफ घटाने पर सुप्रीम कोर्ट में PIL, हरि शरण देवगन समेत डॉक्टरों ने दी NBEMS को चुनौती
  • NEET-PG कट-ऑफ घटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल
  • शून्य और निगेटिव परसेंटाइल तक कट-ऑफ घटाने पर सवाल
  • मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल प्रोफेशन की गुणवत्ता पर खतरे का दावा


NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ प्रतिशत में भारी कटौती का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज द्वारा 13 जनवरी को जारी नोटिस को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दाखिल की गई है।

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरि शरण देवगन, न्यूरोसर्जन सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. आकाश सोनी की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि नोटिस के जरिए NEET-PG का कट-ऑफ असामान्य रूप से बेहद नीचे, यहां तक कि शून्य और निगेटिव परसेंटाइल तक घटा दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस फैसले को चुनौती देते हुए इसे अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में मानकों को इस स्तर तक गिराना मरीजों की सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और मेडिकल प्रोफेशन की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है।

याचिका में कहा गया है कि मेडिसिन कोई सामान्य पेशा नहीं, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव जीवन और गरिमा से जुड़ा है। केवल खाली सीटें भरने के नाम पर मेरिट को खत्म करना, एक प्रतिस्पर्धी परीक्षा को औपचारिक प्रक्रिया में बदल देता है और इससे पेशेवर मानकों का संस्थागत पतन होता है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी है कि PG स्तर पर मेरिट में ढील देना नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 की भावना और वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य के डॉक्टरों के चयन मानदंड पर बड़ा असर पड़ सकता है।