पानीपत में ‘पिल्ला किडनैपर’ बंदर, मचा रखी है सनसनी, 15 दिन बाद एक को छुड़ाया, दूसरा अभी कब्जे में; रेस्क्यू टीम पीछे-पीछे दौड़ रही
पानीपत की रेलवे रोड कॉलोनी में एक बंदर पिछले 15 दिनों से कुत्तों के पिल्लों को उठाकर छतों पर घूम रहा है। एक पिल्ले को रेस्क्यू किया गया, जबकि दूसरे को छुड़ाने के लिए अभियान जारी है। इलाके में दहशत का माहौल है।
■ दो हफ्तों से कुत्तों के पिल्लों को उठाकर छतों पर घूम रहा बंदर
■ एक पिल्ले को रेस्क्यू किया गया, दूसरे को लेकर फिर फरार
■ इलाके में दहशत, बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
हरियाणा के पानीपत जिले में इन दिनों एक बंदर की अजीब और खतरनाक हरकतें पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। रेलवे रोड स्थित सरकारी आवास कॉलोनी में पिछले करीब 15 दिनों से यह बंदर कुत्तों के छोटे-छोटे पिल्लों को उठाकर अपने साथ ले जा रहा है। शुरुआत में इसकी हरकत लोगों के लिए कौतूहल का विषय थी, लेकिन अब यह मामला दहशत में बदल चुका है।
सबसे अहम बात यह है कि बंदर पिल्लों को नुकसान पहुंचाए बिना कई-कई दिन तक अपने साथ छतों, पेड़ों और दीवारों पर लेकर घूमता रहा। स्थानीय निवासी गौरव के अनुसार, बंदर एक काले-सफेद पिल्ले को उठाकर एक छत से दूसरी छत पर छलांग लगाता रहता था। वह पिल्ले को गोद में दबाए रखता था, लेकिन उसे छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था।
स्थिति गंभीर होती देख गौरव ने करनाल स्थित एनजीओ रॉकस्टार फैमिली के संचालक पवन शर्मा से संपर्क किया। पवन शर्मा अपनी विशेष रेस्क्यू टीम, एंबुलेंस और जरूरी उपकरणों के साथ पानीपत पहुंचे। जब टीम मौके पर पहुंची तो बंदर सरकारी कॉलोनी की एक ऊंची छत पर पिल्ले को सीने से लगाए बैठा था।
रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं था। करीब 6 घंटे तक टीम ने बंदर को घेरने की कोशिश की। बंदर बेहद चालाकी दिखाते हुए जैसे ही किसी को पास आता देखता, वह पिल्ले को लेकर दीवारों, पेड़ों और बिजली के खंभों पर चढ़ जाता। आखिरकार टीम ने ‘ह्यूमन साइकोलॉजी’ का सहारा लिया। बंदर को फल का लालच देकर नीचे बुलाया गया। जैसे ही वह खाने के लिए झुका, टीम के सदस्य ने फुर्ती दिखाते हुए उसके हाथ से पिल्ले को सुरक्षित छुड़ा लिया। इस दौरान बंदर ने हमला करने की कोशिश भी की, लेकिन सुरक्षा उपकरणों के कारण टीम सुरक्षित रही।
इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली ही थी कि अगले ही दिन बंदर ने एक और पिल्ले को उठा लिया। इस बार उसका व्यवहार ज्यादा खतरनाक नजर आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंदर ने पिल्ले को लेकर पानी की टंकी में डुबो दिया। कुछ क्षणों के लिए लोगों की सांसें थम गईं, लेकिन बंदर ने उसे फिर बाहर निकाल लिया।
गुरुवार को रेस्क्यू टीम दोबारा करनाल से पानीपत पहुंची, लेकिन इस बार बंदर और ज्यादा सतर्क था। उसने टीम की वर्दी और गाड़ी तक पहचान ली थी। जैसे ही टीम आसपास पहुंचती, वह पिल्ले को लेकर गायब हो जाता। करीब 7 घंटे तक चले इस ‘चूहे-बिल्ली’ के खेल में टीम को सफलता नहीं मिली। बंदर एक हाथ से लोगों द्वारा फेंका गया खाना खाता रहा और दूसरे हाथ से पिल्ले को सीने से चिपकाए रखा।
रेलवे रोड इलाके में इस नजारे को देखने के लिए भारी भीड़ जुट रही है। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि अगर बंदर जानवरों के बच्चों को इस तरह उठा सकता है, तो घरों के आंगन या छत पर खेल रहे छोटे बच्चों के लिए भी खतरा हो सकता है। अब लोग अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं।
रेस्क्यू टीम ने बताया है कि शुक्रवार को नए जाल और रणनीति के साथ फिर से अभियान चलाया जाएगा। पूरे इलाके की निगाहें अब इस ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं।
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Akhil Mahajan