26 घंटे में उठीं बाप-बेटी की अर्थियां, जिस बहन की उठनी थी डोली, उसे देनी पड़ी मुखाग्नि

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26 घंटे में उठीं बाप-बेटी की अर्थियां, जिस बहन की उठनी थी डोली, उसे देनी पड़ी मुखाग्नि

5 जुलाई को हंस नगर के मकान में हुए धमाके में झुलसे पिता-पुत्री की इलाज के दौरान मौत

बहन के अंतिम संस्कार के करीब 26 घंटे बाद बेटे आकाश ने पिता को भी दी अंतिम विदाई

परिजनों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी, धमाके की असली वजह अब भी स्पष्ट नहीं


रेवाड़ी। शहर के हंस नगर में 5 जुलाई को हुए भीषण धमाके ने एक परिवार की खुशियां कुछ ही दिनों में मातम में बदल दीं। जिस घर में पांच महीने बाद बेटी की शादी की तैयारियां होनी थीं, वहां महज छह दिन के भीतर पिता और बेटी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 26 वर्षीय आकाश चौहान ने जिन हाथों से अपनी बहन तन्नु चौहान की चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी, करीब 26 घंटे बाद उन्हीं हाथों से उसे अपने पिता और सेना से सेवानिवृत्त नायब सूबेदार सतबीर चौहान की चिता को भी मुखाग्नि देनी पड़ी। गांव टांकड़ी के श्मशानघाट में एक के बाद एक उठीं दो अर्थियों ने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और हंस नगर के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे के बाद अब परिवार न्याय और धमाके की वास्तविक वजह सामने लाने की मांग कर रहा है।

पांच महीने बाद उठनी थी बेटी की डोली, उससे पहले घर से उठ गई अर्थी

परिवार के अनुसार, तन्नु चौहान की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और उसका रिश्ता कैथल निवासी हरियाणा पुलिस के एक क्लर्क के साथ तय हुआ था। 25 नवंबर को उसकी शादी होनी थी। परिवार आने वाले दिनों की खुशियों और शादी की तैयारियों को लेकर उत्साहित था, लेकिन 5 जुलाई की शाम हुए धमाके ने सब कुछ बदल दिया।

धमाके में गंभीर रूप से झुलसी तन्नु को इलाज के लिए पहले रेफर किया गया और बाद में दिल्ली के अस्पताल में उपचार चला। चार दिन तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद 9 जुलाई को तन्नु की मौत हो गई। 10 जुलाई की शाम उसका शव गांव टांकड़ी लाया गया, जहां भाई आकाश ने बहन की चिता को मुखाग्नि दी।

उस समय पिता सतबीर चौहान अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर लौटेंगे, लेकिन बहन की चिता की आग ठंडी होने से पहले ही परिवार को दूसरी दुखद खबर मिल गई।

बहन के बाद पिता की मौत, 26 घंटे में दूसरी बार श्मशान पहुंचा बेटा

शनिवार सुबह करीब 11 बजे इलाज के दौरान सतबीर चौहान ने भी दम तोड़ दिया। उनका शव देर शाम गांव टांकड़ी पहुंचा, जहां अंतिम संस्कार किया गया। करीब 26 घंटे के भीतर आकाश को दूसरी बार अपने किसी बेहद करीबी को मुखाग्नि देनी पड़ी।

एक दिन पहले बहन और अगले ही दिन पिता की अंतिम यात्रा ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। हंस नगर से लेकर गांव टांकड़ी तक शोक का माहौल रहा। परिवार के रिश्तेदारों और आसपास के लोगों के चेहरों पर हादसे का दर्द साफ दिखाई दिया।

5 जुलाई की शाम एक धमाके ने बदल दी पूरे परिवार की जिंदगी

घटना 5 जुलाई की शाम की है। पूर्व सैनिक सतबीर चौहान अपने दोस्त जयभगवान के साथ घर के बाहर बैठे थे। परिवार के अनुसार, घर के भीतर तन्नु कपड़ों पर प्रेस करने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ।

धमाका इतना तेज था कि मकान के खिड़की-दरवाजों को भी नुकसान पहुंचा। तन्नु इसकी चपेट में आ गई। उसे बचाने के लिए पहुंचे सतबीर और उनके दोस्त भी झुलस गए। बचाव के प्रयास में सतबीर की पत्नी मधु भी चपेट में आईं। घर में मौजूद दो साल की बच्ची भी हादसे से प्रभावित हुई।

आसपास के लोग आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत को देखते हुए घायलों को अलग-अलग हायर सेंटर रेफर किया गया।

कुछ देर बाद आने वाले थे ट्यूशन के बच्चे, टल सकता था और बड़ा हादसा

बताया गया है कि तन्नु बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी। हादसे के कुछ समय बाद ही करीब 15 बच्चों के वहां पहुंचने का समय था। ऐसे में धमाके के समय बच्चों की मौजूदगी नहीं होने से एक और बड़ी त्रासदी टल गई।

हालांकि, इस हादसे में एक ही परिवार के पिता और बेटी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार और स्थानीय लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर घर में इतना बड़ा धमाका किस वजह से हुआ।

छह दिन बाद भी धमाके की वास्तविक वजह पर स्थिति स्पष्ट नहीं

हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस, फोरेंसिक टीम और गैस कंपनी की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। अलग-अलग टीमों ने कई दिनों तक जांच की, लेकिन परिवार के अनुसार पिता-पुत्री की मौत के बाद भी धमाके की वास्तविक वजह को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।

प्रारंभिक स्तर पर गैस रिसाव की आशंका की चर्चा हुई, लेकिन पुलिस की ओर से जांच पूरी होने तक किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है। अब परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर वास्तविक कारण सार्वजनिक किया जाए।

मां की शिकायत पर गैस कंपनी के कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज

तन्नु की मौत के बाद उसकी मां मधु की शिकायत पर मॉडल टाउन थाना पुलिस ने इंद्रप्रस्थ गैस कंपनी के कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।

परिवार का कहना है कि हादसे की वजह और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पिता और बेटी की मौत के बाद परिवार के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी जवाबदेही को लेकर नाराजगी बढ़ी है।

पूर्व सैनिक थे सतबीर चौहान, 2010 में नायब सूबेदार के पद से हुए थे रिटायर

सतबीर चौहान मूल रूप से गांव टांकड़ी के रहने वाले थे। वह सेना में सेवाएं देने के बाद वर्ष 2010 में नायब सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इससे पहले उनका परिवार वर्ष 2000 में गांव से रेवाड़ी आकर रहने लगा था।

परिवार में बेटा आकाश और बेटी तन्नु थे। आकाश एक निजी कंपनी में काम करता है, जबकि तन्नु की पढ़ाई पूरी होने के बाद उसकी शादी तय कर दी गई थी। परिवार आने वाली शादी की तैयारियों में जुटने वाला था, लेकिन हादसे ने पूरा माहौल बदल दिया।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नहीं पहुंचने पर फूटा लोगों का गुस्सा

सतबीर चौहान की मौत की खबर पहुंचने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि इतना बड़ा हादसा होने और एक ही परिवार में दो मौतें होने के बावजूद बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने परिवार के पास पहुंचकर उनकी पीड़ा जानने की जरूरत नहीं समझी।

परिजनों का कहना है कि उन्हें केवल संवेदना नहीं, बल्कि हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है। परिवार ने संकेत दिया है कि यदि न्याय की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह अपनी आवाज उच्च स्तर तक उठाएगा।

परिवार बोला— सोमवार तक करेंगे इंतजार, फिर न्याय के लिए आगे बढ़ाएंगे लड़ाई

सतबीर चौहान के भतीजे टोनी चौहान ने परिवार की पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि जिस बेटी को कुछ महीने बाद शादी के बाद विदा करना था, उसी की अर्थी उठानी पड़ी और उसके बाद परिवार ने सतबीर चौहान को भी खो दिया।

परिवार ने कहा है कि वह सावरनी की रस्म तक प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार करेगा। यदि तब तक जांच और न्याय की दिशा में ठोस कदम दिखाई नहीं दिए तो परिवार आगे की रणनीति तय करेगा।

हंस नगर का यह हादसा अब केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं रहा। पिता-पुत्री की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर धमाके की वास्तविक वजह क्या थी और यदि इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है।