रुपया पहली बार ₹92.05 पर, रिकॉर्ड गिरावट: इजराइल-ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाया दबाव
मिडिल-ईस्ट में इजराइल-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे महंगाई और आयातित सामान के दाम बढ़ने की आशंका है।
■ डॉलर के मुकाबले रुपया ₹92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर
■ मिडिल-ईस्ट तनाव और $85 प्रति बैरल तेल से बढ़ी डॉलर की मांग
■ विदेशी सामान, पेट्रोल-डीजल और पढ़ाई-घूमना हो सकता है महंगा
नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय रुपया आज 4 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर ₹92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले जनवरी में रुपया ₹91.98 तक फिसला था, लेकिन इस बार यह पहली बार 92 के पार चला गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक Israel और Iran के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपए पर दबाव बना रह सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि इस साल अब तक रुपया 2% से ज्यादा कमजोर हो चुका है और 2026 में यह दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।
रुपए के गिरने की तीन बड़ी वजह
1. कच्चे तेल की कीमत में उछाल
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें करीब $85 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से देश को ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
2. सेफ हेवन के तौर पर डॉलर की मांग
युद्ध और अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश करते हैं। डॉलर मजबूत होने से उभरते बाजारों की मुद्राएं, खासकर रुपया, दबाव में आ जाती हैं।
3. महंगाई का खतरा
तेल महंगा होने का सीधा असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है। इससे देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है। महंगाई के डर से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना सकते हैं, जिससे रुपए पर और दबाव बढ़ सकता है।
ट्रेड डील से मिली राहत खत्म
पिछले महीने अमेरिका और भारत के बीच हुई ट्रेड डील के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में पैसा लगाया था और रुपए ने थोड़ी रिकवरी दिखाई थी। लेकिन जैसे-जैसे मिडिल-ईस्ट में हालात बिगड़े, वह राहत अल्पकालिक साबित हुई।
आम आदमी पर क्या असर होगा?
विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी
अगर आप विदेश में पढ़ाई या घूमने की योजना बना रहे हैं, तो डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित सामान महंगे
मोबाइल, लैपटॉप और विदेश से आने वाले पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि कंपनियां इनका भुगतान डॉलर में करती हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं
यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका है।
RBI की भूमिका अहम
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपए की दिशा काफी हद तक मिडिल-ईस्ट के हालात और ग्लोबल ऑयल मार्केट पर निर्भर करेगी। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि Reserve Bank of India बाजार में हस्तक्षेप कर रुपए को और ज्यादा गिरने से बचाने की कोशिश कर सकता है।
करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
जब किसी देश की मुद्रा डॉलर जैसी मजबूत करेंसी के मुकाबले गिरती है, तो उसे मुद्रा का कमजोर होना या करेंसी डेप्रिसिएशन कहा जाता है। हर देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार होता है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय लेन-देन करता है। फॉरेन रिजर्व घटने-बढ़ने का असर भी करेंसी की कीमत पर पड़ता है।
अगर विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो और डॉलर की उपलब्धता संतुलित रहे, तो मुद्रा स्थिर रहती है। लेकिन डॉलर की मांग बढ़ने और भंडार पर दबाव आने से रुपया कमजोर हो जाता है।
Akhil Mahajan