अमेरिका में शटडाउन काल शुरू, ठप्प हुआ कामकाज, बिना सैलरी छुट्टी पर भेजे जाएंगे साढ़े 7 लाख कर्मचारी

अमेरिका में 1 अक्टूबर 2025 से सरकारी शटडाउन लागू, लगभग 7,50,000 संघीय कर्मचारी बिना वेतन के छुट्टी पर। शिक्षा, राष्ट्रीय उद्यान और अन्य सरकारी सेवाओं में व्यवधान। वैश्विक असर के चलते भारत में निवेश, डॉलर विनिमय और निर्यात प्रभावित होने की संभावना।

अमेरिका में शटडाउन काल शुरू, ठप्प हुआ कामकाज, बिना सैलरी छुट्टी पर भेजे जाएंगे साढ़े 7 लाख कर्मचारी

➤ अमेरिका में सरकार का शटडाउन 1 अक्टूबर 2025 को लागू, कांग्रेस फंडिंग बिल पास करने में विफल
➤ लगभग 7,50,000 संघीय कर्मचारी बिना वेतन के छुट्टी पर, सरकारी सेवाओं में व्यापक व्यवधान
➤ महत्वपूर्ण सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन शटडाउन का वैश्विक आर्थिक असर, विशेषकर भारत पर भी देखने को मिलेगा

अमेरिका में 1 अक्टूबर 2025 से सरकार का शटडाउन शुरू हो गया है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब कांग्रेस फंडिंग बिल पास करने में असफल रही। इसके परिणामस्वरूप लगभग 7,50,000 संघीय कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजा गया है, जिससे सरकारी सेवाओं में व्यापक व्यवधान पैदा हुआ है।

शटडाउन के दौरान कई विभागों और एजेंसियों में कामकाज बाधित हुआ है। शिक्षा विभाग में लगभग 87% कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा गया है, जिससे छात्र ऋण, FAFSA एप्लिकेशन और अन्य शिक्षा-संबंधी सेवाओं में देरी होने की संभावना है। राष्ट्रीय उद्यान आंशिक रूप से खुले रहेंगे, लेकिन सीमित सेवाओं के साथ, केवल उन्हीं पार्कों में जो प्रवेश शुल्क से आय अर्जित करते हैं। अन्य पार्क बंद रहेंगे।

हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं जारी रहेंगी। इनमें सैन्य संचालन, कानून प्रवर्तन, आपातकालीन सेवाएं, सोशल सिक्योरिटी और डाक सेवा शामिल हैं। इन कर्मचारियों को बिना वेतन के काम करना होगा, और बाद में उन्हें भुगतान किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह शटडाउन राजनीतिक असहमति और बजट गतिरोध का परिणाम है। यदि कांग्रेस शीघ्र समाधान नहीं करती है, तो शटडाउन लंबे समय तक चल सकता है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकारी सेवाओं पर और दबाव पड़ेगा। नागरिकों के दैनिक जीवन, शिक्षा, राष्ट्रीय उद्यान, और कई अन्य सेवाओं पर इसका प्रत्यक्ष असर देखने को मिलेगा।

भारत पर संभावित असर:
अमेरिका में शटडाउन का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत के निर्यात, विदेशी निवेश और स्टॉक मार्केट पर असर डाल सकता है। अमेरिकी डॉलर में अनिश्चितता बढ़ने से भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में उतार-चढ़ाव और रुपये की विनिमय दर में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से आईटी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में, जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं, व्यापारिक लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका से होने वाले विदेशी निवेश और क्रेडिट प्रवाह में अस्थिरता आने से भारत में आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं धीमी पड़ सकती हैं।

इस शटडाउन के चलते राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना है, और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।