मेडिकल कॉलेज में छात्रों का आधी रात में हंगामा मेडिकल छात्रों ने उठाए सुविधाओं और फैकल्टी की कमी के मुद्दे
फरीदाबाद के अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं, मरीजों की कमी और फैकल्टी न होने को लेकर देर रात प्रदर्शन किया।
फरीदाबाद मेडिकल कॉलेज में छात्रों का आधी रात प्रदर्शन
■ छात्र बोले- OPD में मरीज कम, कई विभागों में फैकल्टी ही नहीं
■ 2022 बैच ने कहा- क्लिनिकल ट्रेनिंग और भविष्य दोनों खतरे में
फरीदाबाद के छांयसा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में शनिवार देर रात मेडिकल छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं, क्लिनिकल एक्सपोज़र और फैकल्टी की भारी कमी को लेकर छात्र-छात्राओं ने कैंपस में प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्रों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज को वर्ष 2020 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मंजूरी मिली थी और 2022 में पहला बैच शुरू किया गया। उस समय अस्पताल की मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह तैयार नहीं थीं। अब कॉलेज शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में ओपीडी सेवाएं तो शुरू कर दी गई हैं, लेकिन मरीजों की संख्या बेहद कम है। वहीं आईपीडी सेवाएं अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई हैं। इसका सीधा असर मेडिकल छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग पर पड़ रहा है।
छात्रों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में मरीजों के संपर्क और प्रैक्टिकल अनुभव की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन कॉलेज में पर्याप्त मरीज ही नहीं आ रहे। इससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अस्पताल की फार्मेसी सेवाओं को लेकर भी छात्रों ने गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार जरूरी दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं और मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। इससे अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कॉलेज के पहले बैच यानी 2022 बैच के छात्रों ने बताया कि वे सबसे ज्यादा परेशान हैं। उनका कहना है कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। खराब वायरिंग, जनरेटर और पैनल सिस्टम की वजह से बार-बार बिजली कट जाती है। कई बार पीने के पानी तक की किल्लत हो जाती है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि इन समस्याओं को लेकर कई बार कॉलेज प्रशासन, डीन और निदेशक को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। परीक्षा के समय भी छात्रों को इन्हीं खराब परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी छात्रों ने गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि जनरल मेडिसिन, रेडियोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग और मनोरोग जैसे अहम विभागों में फैकल्टी उपलब्ध नहीं है। कई अन्य विभागों में भी केवल एक या दो शिक्षक ही मौजूद हैं, जिससे नियमित कक्षाएं और क्लिनिकल शिक्षण प्रभावित हो रहा है।
छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। समय-समय पर NMC और विश्वविद्यालय की ओर से निरीक्षण में भी कई कमियां सामने आईं, लेकिन उनमें सुधार नहीं किया गया।
मेडिकल छात्रों ने कहा कि जिस संस्थान को एक बड़े तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाना था, वह अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी स्थिति से भी बाहर नहीं निकल पाया है। इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
pooja