BJP में बढ़ी तकरार, मंत्री अरविंद शर्मा और चेयरपर्सनरजनी विरमानी आमने-सामने

गोहाना में मंत्री अरविंद शर्मा और चेयरपर्सन रजनी विरमानी के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कूड़ा उठान योजना, हवन, शुद्धिकरण और पंचनद द्वार निर्माण को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

BJP में बढ़ी तकरार, मंत्री अरविंद शर्मा और चेयरपर्सनरजनी विरमानी आमने-सामने

गोहाना में मंत्री अरविंद शर्मा और चेयरपर्सन रजनी विरमानी के बीच बढ़ी सियासी खींचतान

कूड़ा उठान योजना से शुरू हुआ विवाद हवन और शुद्धिकरण तक पहुंचा

23 में से 15 पार्षद चेयरपर्सन के विरोध में खुलकर सामने आए

हरियाणा भाजपा में सोनीपत के गोहाना से विधायक एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा और नगर परिषद चेयरपर्सन रजनी विरमानी के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान योजना, नगर परिषद कार्यालय में हवन और शुद्धिकरण, पंचनद द्वार निर्माण तथा पार्षदों के विरोध जैसे कई मुद्दों ने इस विवाद को गोहाना की राजनीति का बड़ा केंद्र बना दिया है।

सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच दूरी की शुरुआत करीब 10 महीने पहले हुई थी। गुरुद्वारे के पास बनाए जा रहे एक द्वार के उद्घाटन कार्यक्रम में चेयरपर्सन के पति इंदरजीत उर्फ राजू विरमानी ने मंत्री अरविंद शर्मा को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था।

बताया जाता है कि कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था में कमी को लेकर मंत्री ने मंच से ही राजू विरमानी को टोक दिया था। इसे सार्वजनिक अपमान के रूप में देखा गया और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते चले गए।

विवाद ने नया मोड़ 27 मई को लिया, जब नगर परिषद द्वारा डोर-टू-डोर कूड़ा उठान योजना के तहत नई गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में मंत्री अरविंद शर्मा, वाइस चेयरपर्सन राजबाला मलिक और कई पार्षद मौजूद रहे, लेकिन चेयरपर्सन रजनी विरमानी शामिल नहीं हुईं।

कार्यक्रम के बाद मंत्री ने मीडिया से कहा कि चेयरपर्सन और उनके पति को कार्यक्रम में आने के लिए फोन के माध्यम से आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

घटनाक्रम यहीं नहीं रुका। 29 मई को नगर परिषद कार्यालय में चेयरपर्सन रजनी विरमानी की मौजूदगी में हनुमान चालीसा पाठ, हवन यज्ञ और गंगाजल छिड़काव कराया गया। इस दौरान उन वाहनों और स्थानों पर भी गंगाजल छिड़कने की तस्वीरें सामने आईं, जहां कुछ दिन पहले मंत्री अरविंद शर्मा कार्यक्रम में मौजूद रहे थे।

इस घटना के बाद विपक्षी नेताओं और कुछ पार्षदों ने इसे मंत्री के दौरे के बाद किए गए कथित "शुद्धिकरण" से जोड़कर सवाल उठाए। हालांकि चेयरपर्सन ने इसे पूरी तरह धार्मिक और सकारात्मक उद्देश्य से किया गया आयोजन बताया।

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी दीपक गोयल ने भी इस धार्मिक आयोजन को लेकर प्रशासन और एसडीएम को पत्र लिखकर जानकारी दी। बताया गया कि कार्यालय परिसर में इस प्रकार के आयोजन की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।

रजनी विरमानी ने सफाई देते हुए कहा कि नगर परिषद कार्यालय उनके लिए मंदिर समान है। शहर के विकास, शांति और सकारात्मक वातावरण के लिए हनुमान चालीसा पाठ और हवन कराया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ईओ ने उनके खिलाफ प्रशासन को पत्र क्यों लिखा।

इसी बीच पंचनद द्वार निर्माण को लेकर भी दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। नगर परिषद द्वारा मेन बाजार क्षेत्र में द्वार निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। चेयरपर्सन और उनका पक्ष इसी स्थान पर निर्माण का समर्थन कर रहा है।

वहीं मंत्री अरविंद शर्मा और उनके समर्थकों का कहना है कि मेन बाजार पहले से ही भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। यहां द्वार बनने से यातायात प्रभावित होगा, इसलिए इसे किसी अन्य स्थान पर बनाया जाना चाहिए।

राजनीतिक विवाद अब नगर परिषद के भीतर भी दिखाई देने लगा है। 23 सदस्यीय परिषद में से 15 पार्षद चेयरपर्सन के विरोध में सामने आ चुके हैं। पार्षदों का आरोप है कि परिषद में फैसले मनमाने ढंग से लिए जा रहे हैं और उनकी राय को महत्व नहीं दिया जा रहा।

वाइस चेयरपर्सन राजबाला मलिक ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री दो बार परिषद कार्यक्रमों में आए, लेकिन दोनों बार चेयरपर्सन अनुपस्थित रहीं। उनके जाने के बाद पूजा-पाठ और हवन कराए गए, जिससे गलत संदेश गया है।

वहीं मंत्री के पीए सुनील लाकड़ा ने कूड़ा उठान योजना के टेंडर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पहले यह कार्य लगभग 19 करोड़ रुपए में प्रस्तावित था, जबकि अब करीब 12 करोड़ रुपए में पांच वर्षों के लिए किया गया है।

इस पर राजू विरमानी ने जवाब देते हुए कहा कि लगाए गए आरोपों के सबूत पेश किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि टेंडर पूरी सरकारी प्रक्रिया और नियमों के तहत जारी हुआ है।

राजू विरमानी ने यह भी बताया कि चेयरपर्सन कार्यालय की ओर से ईओ दीपक गोयल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि उन्होंने चेयरपर्सन के खिलाफ प्रशासन को पत्र किस अधिकार के तहत लिखा।

पूरे विवाद पर मंत्री अरविंद शर्मा का कहना है कि सांसद और विधायक होने के नाते वे नगर परिषद के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं और उनका उद्देश्य केवल गोहाना का विकास है। उन्होंने कहा कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं है और बाकी सवाल संबंधित लोगों से पूछे जाने चाहिए।