HPSC को झटका: फोरेंसिक विभाग में सीधी भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक, असिस्टेंट डायरेक्टर की भर्ती रद्द
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फोरेंसिक साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर पदों पर सीधी भर्ती रद्द की। योग्य सीनियर साइंटिफिक ऑफिसरों को प्रमोशन का हक बताया।
- हाईकोर्ट ने फोरेंसिक विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर की सीधी भर्ती रद्द की
- योग्य सीनियर साइंटिफिक ऑफिसरों को प्रमोशन का अधिकार बताया
- HPSC और सरकार की अनुभव वाली दलील खारिज
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फोरेंसिक साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर (टॉक्सिकोलॉजी) के दो पदों पर की गई सीधी भर्ती को रद्द कर दिया है। इस फैसले से विभाग में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जगमोहन बंसल ने स्पष्ट किया कि जब विभाग में योग्य और अनुभवी सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर उपलब्ध हैं, तो सरकार को सीधी भर्ती करने का कोई अधिकार नहीं है।
यह मामला तब सामने आया, जब हरियाणा सरकार ने 15 जुलाई 2025 को विज्ञापन जारी कर फोरेंसिक साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के दो पद सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया था।
इस विज्ञापन को फोरेंसिक साइंस लैब मधुबन में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी राम निवास नैन और उनके एक सहकर्मी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्षों से सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के पद पर कार्य कर रहे हैं और सेवा नियमों के अनुसार उन्हें पहले पदोन्नति मिलनी चाहिए थी।
राज्य सरकार और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने कोर्ट में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं को नियमित पदोन्नति 2021 में मिली थी। सरकार का कहना था कि उनके पास आवश्यक पांच वर्ष का नियमित अनुभव नहीं था, इसलिए सीधी भर्ती करनी पड़ी।
हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सेवा नियमों में कहीं भी यह शर्त नहीं है कि अनुभव केवल नियमित पदोन्नति के बाद का ही माना जाएगा। नियमों में केवल यह उल्लेख है कि उम्मीदवार के पास सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के रूप में पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न सरकार और न ही न्यायालय नियमों में अपने स्तर पर कोई शब्द जोड़ सकते हैं। नियमित सेवा जैसी शर्त घुसाना कानूनन गलत है।
हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों याचिकाकर्ता 2013 और 2016 से सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के रूप में कार्य कर रहे थे। इस आधार पर उनके पास आवश्यक अनुभव से कहीं अधिक अवधि का अनुभव मौजूद था। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें नजरअंदाज कर सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया, जो नियमों के विपरीत है।
इन सभी तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने असिस्टेंट डायरेक्टर (टॉक्सिकोलॉजी) के दोनों पदों पर जारी विज्ञापन को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि इन पदों को पहले पदोन्नति के जरिए भरा जाना चाहिए था और सीधी भर्ती कानून के खिलाफ है।
Akhil Mahajan