हांसी में 15 अगस्त के पथराव पर सांसद जयप्रकाश का बड़ा बयान, बोले- सरकार बातचीत करे, दमन से नहीं निकलेगा रास्ता
हांसी में 15 अगस्त के पथराव और 200 से अधिक लोगों पर केस के बीच सांसद जयप्रकाश ने सरकार से बातचीत करने और विवाद सुलझाने की मांग की।
➤ हांसी पथराव मामले में 200 से अधिक लोगों पर केस दर्ज होने पर उठाए सवाल
➤ जयप्रकाश बोले- सरकार पीड़ित परिवार और धरनारत कमेटी से सीधे बातचीत करे
➤ कर्मचारियों, किसानों और ग्रामीण मुद्दों पर भी सरकार को घेरा, बोले- अहंकार छोड़ना होगा
हांसी। 15 अगस्त को हांसी में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुए पथराव के बाद मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना में पुलिस की ओर से 200 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किए जाने के बाद अब कांग्रेस सांसद जयप्रकाश ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर धरना और प्रदर्शन करना गलत नहीं है, लेकिन सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
सांसद जयप्रकाश ने बातचीत के दौरान कहा कि 15 अगस्त का पर्व देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसी दौरान हांसी में जिस तरह ग्रामीणों और पुलिस के बीच पत्थरबाजी की स्थिति बनी, उससे परिस्थितियां गंभीर हुई हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि मामले को केवल पुलिस और प्रशासन के स्तर पर छोड़ने के बजाय राजनीतिक स्तर पर भी बातचीत की जाए।
जयप्रकाश के अनुसार, कुछ दिन पहले जब मुख्यमंत्री हिसार आए थे, तब पंचायत से जुड़ी कमेटी के कुछ लोग उनसे मिले थे। सांसद ने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे हैं और उनकी मांगों को लेकर लगातार बातचीत की जरूरत है, तो सरकार को खुद आगे आकर उनसे संवाद करना चाहिए।
200 से अधिक लोगों पर केस को लेकर भी सवाल
हांसी पथराव मामले में पुलिस की ओर से 200 से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने को लेकर भी जयप्रकाश ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें केवल दंगाई या षड्यंत्रकारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक ये लोग अपनी मांगों को लेकर पंचायत और ग्रामीणों के स्तर पर आगे आए थे।
सांसद ने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी और पथराव हुआ, तो इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि पूरा विवाद किस परिस्थिति में पैदा हुआ। उन्होंने सरकार से कहा कि बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालना ज्यादा उचित होगा।
सरकार को सीधे बातचीत करनी चाहिए
जयप्रकाश ने कहा कि सरकार को धरने पर बैठे लोगों, संबंधित कमेटी और परिवारों के साथ बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों के माध्यम से बातचीत करने के बजाय मुख्यमंत्री और मंत्रियों को आगे आने की बात कही।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को खुद लोगों को बुलाकर बातचीत करनी चाहिए या जरूरत हो तो मौके पर जाकर स्थिति समझनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार के पास बातचीत के लिए कई रास्ते और तंत्र मौजूद हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।
सांसद ने यह भी कहा कि यदि सरकार समय रहते लोगों से बात करती है तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है। उनके मुताबिक लोगों को लंबे समय तक धरने पर बैठाए रखना और फिर उनके खिलाफ कड़ी धाराओं में मामले दर्ज करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया
जयप्रकाश ने अपने बयान में लोकतांत्रिक तरीके से किए जाने वाले धरना-प्रदर्शन और घेराव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन करना व्यवस्था का हिस्सा है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में घेराव और प्रदर्शन को गैर-लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता में बैठी सरकार लोगों की बात नहीं सुनेगी, तो लोग अपनी आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन करेंगे।
हालांकि, हांसी में 15 अगस्त को हुई पत्थरबाजी और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सांसद ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से गलत हुआ है तो कार्रवाई की प्रक्रिया अपनी जगह है। लेकिन पूरे मामले को बातचीत के माध्यम से शांत करने की जिम्मेदारी भी सरकार की है।
सरकार से पूछा- पीड़ित परिवार के पास कौन पहुंचेगा
जयप्रकाश ने अपने बयान में एक परिवार से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि यदि किसी परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उस परिवार के पास पहुंचे।
उन्होंने कहा कि सरकार को परिवार के दुख में शामिल होना चाहिए और यदि किसी घटना में मुख्य आरोपी की पहचान हो चुकी है तो उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जिस मामले को लेकर चर्चाएं और आरोप सामने आ रहे हैं, उस पर सरकार और भाजपा को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सांसद ने कहा कि संबंधित परिवारों और पंचायत की कमेटी को भी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
किसानों और मजदूरों के मुद्दे भी उठाए
बातचीत के दौरान जयप्रकाश ने हांसी के घटनाक्रम से आगे बढ़ते हुए किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल एक वर्ग की समस्या नहीं, बल्कि अलग-अलग वर्गों की समस्याओं को सुनना चाहिए।
उन्होंने किसानों की स्थिति, मनरेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि मनरेगा का उद्देश्य गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और ग्रामीण मजदूरों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें काम के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
जयप्रकाश ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद ने सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी शहरों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनसे बातचीत की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर सरकार की ओर से पर्याप्त संवाद नहीं हो रहा। जयप्रकाश ने कहा कि कांग्रेस सफाई कर्मचारियों के साथ है और उनकी समस्याओं को लेकर आवाज उठाती रहेगी।
कर्मचारियों की भर्ती और नियमितीकरण का मुद्दा
जयप्रकाश ने कर्मचारियों के नियमितीकरण और भर्ती को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल की एक नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय करीब 12,000 कर्मचारियों को ठेकेदारी व्यवस्था के तहत लगाए जाने का जिक्र किया गया था।
उन्होंने मौजूदा सरकार से सवाल किया कि पिछले 12 साल में कितने कर्मचारियों को स्थायी भर्ती या नियमित किया गया। उन्होंने कहा कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण मजदूरों के शोषण का मुद्दा भी सामने आता है।
संसद में उठने वाले मुद्दों का भी किया जिक्र
जयप्रकाश ने अपने बयान में छात्रों के प्रदर्शन और संसद से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो उनके साथ भी बातचीत की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और उनके साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है। उनके अनुसार, सरकार को प्रदर्शनकारियों की आवाज सुननी चाहिए और हर विवाद का समाधान पुलिस बल के जरिए करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
हांसी के घटनाक्रम पर अब नजर
15 अगस्त को हांसी में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई पथराव की घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और दर्ज मामलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद जयप्रकाश के बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
एक तरफ पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था का सवाल है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की मांगों और सरकार से बातचीत की मांग भी सामने है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हांसी के इस विवाद का समाधान बातचीत से निकलता है या कार्रवाई और विरोध का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।
Akhil Mahajan