हरियाणा में 1.45 लाख म्यूटेशन लंबित, सरकार सख्त; डेढ़ महीने में निपटाने के निर्देश

हरियाणा में 1.45 लाख से अधिक म्यूटेशन मामले लंबित हैं। सरकार ने सभी जिलों के DC को डेढ़ महीने में निपटाने के निर्देश दिए हैं। जल्द ऑटो-म्यूटेशन पोर्टल अपग्रेड होगा।

हरियाणा में 1.45 लाख म्यूटेशन लंबित, सरकार सख्त; डेढ़ महीने में निपटाने के निर्देश

➤ 1.45 लाख से अधिक म्यूटेशन मामले लंबित
➤ 65 हजार केस पटवारी-कानूनगो स्तर पर अटके
➤ डेढ़ महीने में निपटाने के लिए DC को निर्देश


हरियाणा सरकार ने प्रदेश में संपत्तियों की रजिस्ट्री को पूरी तरह पेपरलेस बनाकर पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लेकिन इसके साथ जो ऑटो-म्यूटेशन (स्वतः इंतकाल) का सपना देखा गया था, वह अभी तक फाइलों में अटका हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में करीब 1.45 लाख म्यूटेशन (इंतकाल) मामले लंबित हैं।

हैरानी की बात यह है कि देरी की वजह तकनीकी खामी नहीं, बल्कि राजस्व विभाग के निचले स्तर पर हो रही सुस्ती बताई जा रही है। पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार स्तर पर मामलों की धीमी गति से प्रोसेसिंग के कारण जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। इसके लिए डेढ़ महीने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि भविष्य में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था लागू करने का रास्ता साफ हो सके।

65 हजार मामले पटवारी-कानूनगो स्तर पर अटके

प्रदेश के 22 जिलों में 143 तहसील-उप तहसील और 7104 गांव आते हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह तक करीब 80,182 मामलों में ऑनलाइन एंट्री ही दर्ज नहीं हो सकी। वहीं, करीब 65,221 मामले पटवारी और कानूनगो स्तर पर स्वीकृति के इंतजार में लंबित हैं।

स्पष्ट है कि तकनीकी प्रणाली तैयार होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम की गति संतोषजनक नहीं है।

जनवरी में विशेष कैंप से 98 हजार मामले निपटाए

जनवरी के पहले सप्ताह तक प्रदेश में करीब 2.43 लाख इंतकाल लंबित थे। इसके बाद राजस्व विभाग ने प्रत्येक शनिवार को विशेष कैंप आयोजित किए। इन कैंपों के जरिए करीब 98 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया गया।

हालांकि इसके बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में मामले पेंडिंग हैं, जो सरकार की चिंता का कारण बने हुए हैं।

क्या है म्यूटेशन और क्यों जरूरी है

म्यूटेशन, जिसे स्थानीय भाषा में इंतकाल, दाखिल-खारिज या नामांतरण भी कहा जाता है, वह प्रक्रिया है जिसके जरिए राजस्व रिकॉर्ड यानी जमाबंदी में पुराने मालिक की जगह नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।

यह प्रक्रिया इसलिए अनिवार्य है क्योंकि—

स्वामित्व का कानूनी प्रमाण इसी से स्थापित होता है।
• भविष्य में संपत्ति विवाद से बचाव के लिए इंतकाल जरूरी है।
• सरकारी करों और राजस्व वसूली के लिए विभाग इसी रिकॉर्ड का उपयोग करते हैं।

रजिस्ट्री के बाद यदि म्यूटेशन नहीं कराया गया तो मालिकाना हक के प्रमाण में कानूनी अड़चनें आ सकती हैं।

जल्द शुरू होगा ऑटो-म्यूटेशन पोर्टल

भू-अभिलेख विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले एक से डेढ़ महीने में पेपरलेस रजिस्ट्री पोर्टल को अपग्रेड किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि रजिस्ट्री होते ही इंतकाल स्वतः हो जाए। इसके लिए पहले सभी पुराने लंबित मामलों का निपटारा अनिवार्य है। अपग्रेडेशन के बाद पोर्टल स्वतः म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी करेगा, जिससे आम जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी।