महिला आयोग अध्यक्ष की टिप्पणी पर नर्सिंग कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी विरोध

हरियाणा में नर्सिंग स्टाफ ने महिला आयोग अध्यक्ष रेणु भाटिया की टिप्पणी के विरोध में दो घंटे की हड़ताल की। एसोसिएशन ने उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई है।

महिला आयोग अध्यक्ष की टिप्पणी पर नर्सिंग कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी विरोध

हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की दो घंटे की हड़ताल

महिला आयोग अध्यक्ष रेणु भाटिया के बयान पर प्रदेशभर में विरोध तेज

नर्सिंग एसोसिएशन ने चेयरपर्सन को पद से हटाने की मांग उठाई


हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में मंगलवार को नर्सिंग स्टाफ  दो घंटे की हड़ताल पर हैं सुबह 10 बजे से हड़ताल जारी है, जो दोपहर 12 बजे तक चलने वाली है। इस हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। नर्सिंग स्टाफ का यह विरोध राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया के उस बयान को लेकर है, जिसे नर्सिंग कर्मचारियों ने अपने सम्मान पर चोट बताया है।

मामले की शुरुआत कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) सिविल अस्पताल से हुई, जहां 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के मामले की जांच के लिए पहुंचीं रेणु भाटिया ने अस्पताल प्रशासन और नर्सिंग स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई थी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक नर्स से पूछा था कि क्या उसकी भी बेटी है। नर्स के हां कहने पर उन्होंने सवाल किया कि क्या वह अपनी बेटी को 15 मिनट के लिए किसी कमरे में अकेला छोड़ सकती है। इसी टिप्पणी को लेकर अब विवाद गहरा गया है।

इस बयान के बाद पहले कुरुक्षेत्र सिविल अस्पताल में विरोध शुरू हुआ और अब यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल गया है। हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन ने प्रदेशभर में सांकेतिक हड़ताल का आह्वान किया है। एसोसिएशन की प्रदेश प्रधान विनीता का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ की सार्वजनिक रूप से बेइज्जती की गई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग ऑफिसर्स भी महिलाएं हैं और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

नर्सिंग कर्मचारियों की नाराजगी केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि निरीक्षण के दौरान रेणु भाटिया ने नर्सिंग स्टाफ पर आरोपी डॉक्टर से मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे। साथ ही अस्पताल के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर और नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। यही कारण है कि विरोध अब और अधिक मुखर हो गया है।

दरअसल, यह पूरा मामला 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म से जुड़ा है। 29 मई को लड़की अपने पिता को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए LNJP अस्पताल पहुंची थी। इसी दौरान पेट दर्द की शिकायत पर उसकी जांच की गई। आरोप है कि अस्पताल में तैनात कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र कुमार शैली ने इलाज के बहाने उसे अपने कब्जे में लेकर कई बार दुष्कर्म किया।

पीड़िता की तबीयत बिगड़ने और ब्लीडिंग होने के बाद मामला सामने आया। लड़की ने वरिष्ठ डॉक्टरों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद आरोपी डॉक्टर अस्पताल छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने 31 मई को पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और 1 जून को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी डॉक्टर की सेवाएं भी समाप्त कर दीं।

महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया का कहना है कि अस्पताल स्टाफ को आरोपी डॉक्टर की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी। उनके अनुसार यदि समय रहते सतर्कता बरती जाती तो यह घटना रोकी जा सकती थी। वहीं दूसरी ओर नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन किसी भी कर्मचारी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना उचित नहीं है।

अब यह मामला केवल अस्पताल प्रशासन और महिला आयोग के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेशभर के नर्सिंग कर्मचारियों के सम्मान और कार्यस्थल की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बन गया है। इसी वजह से नर्सिंग संगठन महिला आयोग अध्यक्ष के इस्तीफे अथवा पद से हटाए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।