हरियाणा में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 10 दिन में तीसरी बार महंगा हुआ तेल
हरियाणा में पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया है। 10 दिन में तीसरी बार बढ़े ईंधन दामों से खेती, ट्रांसपोर्ट और सब्जियों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
➤ हरियाणा में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 10 दिन में तीसरी बार जनता पर महंगाई की मार
➤ सिरसा में पेट्रोल ₹101.73 प्रति लीटर पहुंचा, कई जिलों में 100 रुपए पार हुए रेट
➤ ईंधन महंगा होने से खेती, ट्रांसपोर्ट और सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका
हरियाणा में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर बड़ा असर डाला है। तेल कंपनियों की ओर से शुक्रवार रात नई दरें जारी की गईं, जिसके बाद शनिवार सुबह से प्रदेशभर में बढ़े हुए रेट लागू हो गए। इस बार पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है।
नई कीमतों के बाद हरियाणा में पेट्रोल का औसत रेट ₹100.40 प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि डीजल ₹92.94 प्रति लीटर बिक रहा है। बढ़ती कीमतों के कारण अब प्रदेश के अधिकांश जिलों में पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है।
सबसे ज्यादा कीमत सिरसा में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल ₹101.73 प्रति लीटर तक पहुंच गया। वहीं पंचकूला में पेट्रोल ₹101.06, फतेहाबाद में ₹101.13 और सोनीपत में ₹101.10 प्रति लीटर बिक रहा है। हालांकि पानीपत और करनाल में अभी भी पेट्रोल की कीमत ₹100 से नीचे बनी हुई है।
बीते 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले इसी सप्ताह तेल कंपनियों ने करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। वहीं उससे कुछ दिन पहले पेट्रोल-डीजल के दामों में करीब 3 रुपए प्रति लीटर तक इजाफा किया गया था। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर खेती, ट्रांसपोर्ट, सब्जियों, राशन और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर भी पड़ेगा। ट्रकों और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और खाद्य सामग्री महंगी हो सकती हैं।
किसानों पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप चलाने के लिए किसानों को पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और आने वाले समय में अनाज तथा सब्जियों के दामों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।
सार्वजनिक परिवहन पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। बसों, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में आम आदमी की मासिक बचत पर सीधा असर पड़ने वाला है।
तेल कंपनियों और डीलरों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
तेल कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आयात लागत बढ़ने के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था। इसी वजह से ईंधन की कीमतों में संशोधन करना पड़ा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
महंगाई को लेकर लोगों में नाराजगी भी लगातार बढ़ रही है। गांव माहरा के बुजुर्ग सुरेश ने बताया कि जब वह पेट्रोल पंप पर तेल डलवाने पहुंचे तो नए रेट सुनकर हैरान रह गए। उनका कहना है कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। अब पहले जितने पैसों में कम तेल मिल रहा है।
लोगों ने कहा कि डीजल की कीमत बढ़ने से किसानों, मजदूरों और आम आदमी पर रोजाना अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से महंगाईपर नियंत्रण करने की मांग की।
लगातार बढ़ती महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि पहले जितने पैसों में ज्यादा तेल मिलता था, अब उसी रकम में तेल की मात्रा कम हो गई है।
हर दिन सुबह 6 बजे तेल कंपनियां नए रेट जारी करती हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकारों के वैट और डीलर कमीशन के आधार पर तय होती हैं। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग दिखाई देती हैं।
Akhil Mahajan