रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप डागर गिरफ्तार, CBI ने सुनवाई से पहले ही उठाया; बैंक घोटाले में तीसरे IAS पर शिकंजा
हरियाणा के आईएएस प्रदीप डागर को रिटायरमेंट के दिन CBI ने IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में गिरफ्तार किया। अग्रिम जमानत पर सुनवाई से पहले हुई कार्रवाई में वे मामले के तीसरे गिरफ्तार IAS अधिकारी बने।
➤ रिटायरमेंट के दिन CBI ने IAS प्रदीप डागर को किया गिरफ्तार
➤ अग्रिम जमानत पर सुनवाई से पहले हुई कार्रवाई, बैंक घोटाले में तीसरे IAS की गिरफ्तारी
➤ HSPCB फंड ट्रांसफर मामले में सरकारी धन के गबन का आरोप
हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी ऐसे दिन हुई जब उनका सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का अंतिम दिन था। सीबीआई का कहना है कि डागर सरकारी धन के कथित गबन से जुड़े मामले में जांच के दौरान सहयोग नहीं कर रहे थे और एजेंसी की पहुंच से बाहर बताए जा रहे थे।
सीबीआई के अनुसार, प्रदीप डागर ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी, जिस पर 2 जुलाई को पंचकूला की अदालत में सुनवाई होनी थी। हालांकि उससे पहले ही जांच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक तीन आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले आर.के. सिंह और पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के बैंक खातों में 169 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने पूछताछ में दावा किया था कि एक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर यह राशि चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में ट्रांसफर की गई थी। प्रदीप डागर अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक HSPCB में सदस्य सचिव रहे थे।
सीबीआई का दावा है कि यह मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े करीब 504 करोड़ रुपये कथित तौर पर फर्जी एफडी और शेल कंपनियों के जरिए निकाले गए। इसी बैंकिंग फ्रॉड की व्यापक जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदीप डागर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी ली जा चुकी है। एजेंसी का कहना है कि उन्हें कई बार जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया, लेकिन वे लंबे समय तक उपलब्ध नहीं हुए।
इस मामले में HSPCB के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। सीबीआई उनसे भी पूछताछ कर सकती है। हालांकि उनके खिलाफ अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अभी तक दो आईएएस गिरफ्तार
2025-26 इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) के अनुसार प्रदीप डागर ने रोहतक और गुरुग्राम में कई अचल संपत्तियों का विवरण सरकार को दिया है। दस्तावेजों में रोहतक की भूमि तथा गुरुग्राम के सेक्टर-28 के दो प्लॉट और एटलस प्लेटिनम टावर्स में एक लग्जरी फ्लैट का उल्लेख है। इन संपत्तियों की भी जांच एजेंसी पड़ताल कर रही है।
सीबीआई इस पूरे बैंक घोटाले की जांच डिपार्टमेंट-टू-डिपार्टमेंट इन्वेस्टिगेशन मॉडल के तहत कर रही है। इसमें प्रत्येक विभाग के बैंक रिकॉर्ड, फाइलों, जिम्मेदार अधिकारियों और वित्तीय लेन-देन की अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच के कुछ हिस्सों की निगरानी केंद्रीय स्तर पर की जा रही है।
Akhil Mahajan