रेवाड़ी AIIMS में सितंबर से OPD? MBBS क्लास पर सस्पेंस, 750 बेड और 100 सीटों का लक्ष्य

रेवाड़ी के माजरा AIIMS में सितंबर 2026 से OPD शुरू होने की तैयारी है। 750 बेड, 100 MBBS सीटों और 1700 करोड़ की परियोजना से दक्षिण हरियाणा को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।

रेवाड़ी AIIMS में सितंबर से OPD? MBBS क्लास पर सस्पेंस, 750 बेड और 100 सीटों का लक्ष्य

सितंबर से माजरा एम्स में शुरू हो सकती है ओपीडी
एमबीबीएस कक्षाएं शुरू होने पर अभी भी बना हुआ है सस्पेंस
750 बेड और 100 एमबीबीएस सीटों से दक्षिण हरियाणा को मिलेगा बड़ा फायदा

रेवाड़ी। दक्षिण हरियाणा के लोगों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत की खबर सामने आई है। रेवाड़ी के माजरा में निर्माणाधीन एम्स में इसी साल सितंबर से ओपीडी शुरू होने की संभावना है। एम्स प्रशासन इसके लिए तैयारियों में जुटा हुआ है। हालांकि, इसी सत्र से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होंगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

माजरा में बन रहा यह संस्थान देश का 22वां एम्स और हरियाणा का पहला एम्स है। परियोजना पर करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। प्रमुख भवनों में से तीन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एम्स को ओपीडी शुरू करने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।

सितंबर से ओपीडी शुरू करने की तैयारी...

एम्स प्रशासन का प्रयास है कि सितंबर 2026 से माजरा एम्स में मरीजों को ओपीडी की सुविधा मिलनी शुरू हो जाए। संस्थान को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा और निर्माण पूरा होने के साथ अलग-अलग विभागों को शुरू किया जाएगा।

ओपीडी शुरू होने के बाद दक्षिण हरियाणा, खासकर अहीरवाल क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा राजस्थान से सटे इलाकों के मरीजों को भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए दिल्ली या जयपुर का रुख कम करना पड़ेगा।

एमबीबीएस की 100 सीटों का लक्ष्य...

माजरा एम्स में भविष्य में एमबीबीएस की 100 सीटें प्रस्तावित हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से फिलहाल 50 सीटों की मंजूरी दी जा चुकी है। बाकी सीटों की मंजूरी संस्थान के पूरी तरह कार्यात्मक होने के बाद मिलने की संभावना है।

हालांकि, इस सत्र से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होंगी या नहीं, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। इसके लिए जरूरी भवन, स्टाफ और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर प्रक्रिया जारी है।

राव इंद्रजीत सिंह ने दिए थे निर्देश...

केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने पिछले वर्ष दिसंबर में माजरा एम्स के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को ओपीडी और नए सत्र से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद एम्स प्रशासन ने फरवरी में करीब 1700 विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। भर्ती प्रक्रिया अभी जारी है। चिकित्सा संस्थान के सुचारु संचालन के लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियां अहम मानी जा रही हैं।

मई-जून तक भवन पूरा करने का था लक्ष्य...

एम्स के निदेशक डॉ. डीएन शर्मा ने समीक्षा के दौरान बताया था कि मई-जून 2026 तक प्रमुख भवनों का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बाद अलग-अलग विभागों और सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाना है।

माजरा एम्स को देश के अन्य एम्स की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। यहां मरीजों के इलाज के साथ मेडिकल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना है।

750 बेड और 100 एमबीबीएस सीटें...

माजरा एम्स की पूरी क्षमता विकसित होने के बाद यहां 750 बेड और 100 एमबीबीएस सीटें होने की योजना है। परियोजना के विभिन्न विवरणों में भूमि का क्षेत्रफल अलग-अलग चरणों के संदर्भ में बताया गया है, जबकि संस्थान का निर्माण बड़े स्तर पर किया जा रहा है।

फिलहाल 50 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी मिल चुकी है। संस्थान के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद शेष सीटों के लिए मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

पानी के लिए 26.83 करोड़ रुपये...

एम्स में मरीजों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने को लेकर भी काम किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने नहरी पानी की व्यवस्था के लिए 26.83 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।

योजना के तहत प्रतिदिन करीब 1500 किलोलीटर पानी उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है। इससे मरीजों, अस्पताल के कर्मचारियों और उनके साथ रहने वाले लोगों को पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

सड़क, बिजली और सीवरेज की भी तैयारी...

एम्स शुरू होने से पहले जिला प्रशासन भी मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने में जुटा है। दिसंबर में केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण के बाद डीसी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी।

इस दौरान सड़क, पानी, सीवरेज और बिजली जैसी व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि एम्स में ओपीडी और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होने से पहले आवश्यक सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।

इन जिलों के मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा...

माजरा एम्स के शुरू होने से रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी सहित दक्षिण हरियाणा के कई जिलों के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। राजस्थान सीमा से सटे क्षेत्रों के मरीजों को भी इसका फायदा होगा।

फिलहाल गंभीर उपचार के लिए बड़ी संख्या में मरीज दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करते हैं। एम्स शुरू होने के बाद क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को अपने क्षेत्र के करीब बेहतर इलाज मिल सकेगा।

2015 में हुई थी एम्स की घोषणा...

माजरा एम्स तक पहुंचने की कहानी भी लंबी रही है। वर्ष 2015 में बावल की एक रैली के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने क्षेत्र में एम्स बनाने की घोषणा की थी।

इसके बाद मनेठी पंचायत की ओर से जमीन उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव दिया गया था। वन मंत्रालय से एनओसी से जुड़ी अड़चन के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद क्षेत्र में लंबे समय तक धरने और प्रदर्शन हुए।

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार जमीन खरीदकर एम्स बनाने पर सहमत हुई। इसके बाद माजरा में एम्स निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब यह परियोजना संचालन के चरण की ओर बढ़ रही है।

अब सितंबर पर टिकी नजर...

करीब एक दशक से अधिक समय से एम्स का इंतजार कर रहे दक्षिण हरियाणा के लोगों की नजर अब सितंबर पर है। यदि तैयारियां तय समय के अनुसार पूरी होती हैं तो माजरा एम्स में ओपीडी शुरू होने से क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि, एमबीबीएस कक्षाओं के संचालन को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। संस्थान के पूरी तरह सक्रिय होने के साथ क्षेत्र को मेडिकल शिक्षा और सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ मिलने की उम्मीद है।