IDFC बैंक घोटाले में IAS प्रदीप डागर गिरफ्तार, CBI ने 2 दिन के रिमांड पर लिया
IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में CBI ने IAS प्रदीप डागर को गिरफ्तार कर 2 दिन की रिमांड पर लिया है। पूछताछ में अन्य अधिकारियों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
- CBI ने IAS प्रदीप डागर को गिरफ्तार कर 2 दिन के रिमांड पर लिया
- IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में अन्य बड़े अधिकारियों के नाम सामने आने की संभावना
- रिटायरमेंट के दिन हुई गिरफ्तारी, लंबे समय से जांच से बचने के आरोप
हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IAS अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार देर रात उन्हें पंचकूला की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 2 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया।
CBI अब रिमांड के दौरान प्रदीप डागर से गहन पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ में इस कथित घोटाले से जुड़े अन्य IAS अधिकारियों और बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
सरकार ने 8 अप्रैल 2026 को ही प्रदीप डागर को निलंबित कर दिया था। उस समय वह हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। CBI का आरोप है कि वह लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और एजेंसी से बचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
गौरतलब है कि जिस दिन उनकी गिरफ्तारी हुई, उसी दिन उनका सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का दिन भी था। गिरफ्तारी की आशंका के चलते उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी थी। इससे पहले ही CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक प्रदीप डागर, आर.के. सिंह और पंकज अग्रवाल समेत तीन IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
169 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप
CBI जांच के दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बैंक खातों में 169 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आई थी। मामले में पहले गिरफ्तार किए गए एक डेटा एंट्री ऑपरेटर ने पूछताछ में दावा किया था कि एक IAS अधिकारी के निर्देश पर यह राशि चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में ट्रांसफर की गई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। कथित तौर पर हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े करीब 504 करोड़ रुपये फर्जी एफडी और शेल कंपनियों के माध्यम से निकाले जाने की जांच की जा रही है।
कई बड़े अधिकारी जांच के दायरे में
CBI ने प्रदीप डागर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी ली है। जांच के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं और उनसे भी जल्द पूछताछ हो सकती है।
करोड़ों की संपत्तियां भी जांच के केंद्र में
इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) के अनुसार प्रदीप डागर के पास रोहतक और गुरुग्राम में करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति दर्ज है। रोहतक में उनके नाम 3,181 वर्ग गज भूमि दर्ज है, जबकि गुरुग्राम में तीन संपत्तियां घोषित की गई हैं। इनमें एटलस प्लेटिनम टावर्स स्थित एक लग्जरी फ्लैट भी शामिल है, जिसकी घोषित कीमत 3.34 करोड़ रुपये बताई गई है।
विभागवार जांच कर रही CBI
CBI इस पूरे मामले की जांच डिपार्टमेंट-टू-डिपार्टमेंट इन्वेस्टिगेशन मॉडल के तहत कर रही है। इसके तहत प्रत्येक विभाग के बैंक लेनदेन, संबंधित फाइलों और जिम्मेदार अधिकारियों की अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार दो विभागों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य विभागों में जांच जारी है।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्तर पर की जा रही है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
pooja