Video: दो मंत्रियों का सीधा नाता, फिर भी विकास क्यों लापता? कवि गांव की तस्वीरों ने खड़े किए सवाल

इसराना के कवि गांव में कीचड़, जलभराव, खराब गलियों और तालाब की क्षतिग्रस्त चारदीवारी की तस्वीरों ने विकास और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

Video: दो मंत्रियों का सीधा नाता, फिर भी विकास क्यों लापता? कवि गांव की तस्वीरों ने खड़े किए सवाल

एक मंत्री का पैतृक गांव, दूसरे की विधानसभा, फिर भी बदहाल गलियां
कीचड़, जलभराव और टूटी चारदीवारी ने विकास के दावों पर उठाए सवाल
सरकारी स्कूल के आसपास भी बारिश के बाद बिगड़े हालात


हरियाणा सरकार लगातार प्रदेश में विकास की नई तस्वीर पेश करने का दावा कर रही है। गांवों से लेकर शहरों तक सड़क, सीवरेज, जल निकासी और मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात कही जा रही है। लेकिन इन दावों के बीच पानीपत जिले की इसराना विधानसभा के कवि गांव से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर कई सवाल खड़े कर रही हैं। सबसे अहम बात यह है कि इस गांव का सीधा नाता सरकार के दो मंत्रियों से जुड़ता है। एक तरफ कवि गांव हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का पैतृक गांव है, वहीं दूसरी ओर यह इसराना विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से पंचायत एवं विकास से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री कृष्ण लाल पंवार विधायक हैं। ऐसे में गांव की बदहाल तस्वीरें स्वाभाविक तौर पर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।

सामने आई तस्वीरों में गांव के तालाब की स्थिति भी चिंताजनक नजर आ रही है। तालाब के चारों ओर बनाई गई चारदीवारी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर तालाब में पड़ा दिखाई दे रहा है। वहीं गलियों की मिट्टी और गंदगी भी तालाब की ओर जाती नजर आती है। इससे सार्वजनिक निर्माण और उसके रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर सार्वजनिक संपत्तियों के निर्माण और रखरखाव पर खर्च किए जाने के बाद कुछ समय में उनकी ऐसी स्थिति क्यों बन रही है? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसके बाद रखरखाव की नियमित निगरानी हो रही है?

गांव की तस्वीर सिर्फ तालाब तक सीमित नहीं है। सरकारी स्कूल के आसपास की गलियों के हालात भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। बारिश के बाद गलियों में कीचड़ और गंदगी दिखाई दे रही है। हालात ऐसे नजर आते हैं कि स्थानीय लोगों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए जगह-जगह लगाए गए अस्थायी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का डर भी बना हुआ है।

कवि गांव की इन तस्वीरों के बीच एक बड़ा सवाल जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सामने आता है। अगर बारिश के बाद गलियों में पानी और कीचड़ जमा हो रहा है, तो फिर गांव में जल निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। खासकर तब, जब सरकार की ओर से लगातार गांवों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के दावे किए जा रहे हैं।

यह समस्या केवल कवि गांव तक सीमित होने का दावा भी नहीं किया जा सकता। इसराना विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर जलभराव और खराब जल निकासी की तस्वीरें सामने आती रही हैं। मंडी, स्कूल और रिहायशी इलाकों में बारिश के बाद पानी जमा होना स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है। ऐसे में सवाल यह है कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जा रही है।

कवि गांव की तस्वीरें इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि यह क्षेत्र सरकार के दो मंत्रियों से सीधे जुड़ा हुआ है। गांव शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का पैतृक गांव है और विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पंचायत एवं विकास से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री कृष्ण लाल पंवार करते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की सड़क, सफाई, जल निकासी और सार्वजनिक निर्माण से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद विकास कार्यों की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सवाल यह भी है कि अगर सरकारी योजनाओं के तहत सार्वजनिक संपत्तियों का निर्माण कराया जा रहा है, तो उनके रखरखाव की जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाई जा रही है। तालाब की क्षतिग्रस्त चारदीवारी और बारिश के बाद कीचड़ से भरी गलियां इस सवाल को और गंभीर बना देती हैं। निर्माण के बाद उसकी स्थिति पर निगरानी नहीं रखी गई तो विकास कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का उद्देश्य भी सवालों के घेरे में आ सकता है।

सरकार की ओर से गांवों और शहरों में विकास कार्यों को गति देने के दावे लगातार सामने आते हैं। लेकिन जब मंत्री के विधानसभा क्षेत्र और एक मंत्री के पैतृक गांव से सड़क, जल निकासी, सफाई और सार्वजनिक निर्माण से जुड़ी ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, तो विकास के दावों और जमीन की तस्वीर के बीच का अंतर चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

अब सवाल सीधे तौर पर सामने हैं। आखिर विकास की योजनाएं कागजों से जमीन तक पहुंच रही हैं या नहीं? निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है? तालाब की क्षतिग्रस्त चारदीवारी की स्थिति कब सुधरेगी? बारिश के दौरान जलभराव और कीचड़ से ग्रामीणों को कब राहत मिलेगी? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार गांवों को आधुनिक और बेहतर सुविधाओं से लैस करने का दावा कर रही है, तो कवि गांव की यह तस्वीर उस दावे से कितनी मेल खाती है?

इन सवालों का जवाब अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को देना होगा। City Tehlka की यह रिपोर्ट सरकार के विकास के दावों और कवि गांव की सामने आई जमीनी तस्वीर के बीच मौजूद अंतर को सामने रखने की कोशिश है।