सावन सोमवार पर मंदिर के बाहर भगदड़, 8 महिलाओं की मौत; पोल गिरने के बाद करंट की अफवाह से मची अफरा-तफरी
सावन के तीसरे सोमवार पर हजारों श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ मच गई। पोल गिरने के बाद करंट की अफवाह फैली और बैरिकेडिंग टूट गई। हादसे में 7 महिलाओं की मौत और 12 से ज्यादा लोग घायल हुए।
➤ जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़, अचानक मची भगदड़
➤ पोल गिरने के बाद फैली करंट की अफवाह, देखते ही देखते टूट गई बैरिकेडिंग
➤ 7 महिलाओं की मौत, 12 से ज्यादा घायल; कुछ ही मिनटों में बदल गया माहौल
सावन के तीसरे सोमवार पर जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु कतार में खड़े थे। सुबह-सुबह मंदिर जाने वाले रास्ते पर भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही थी। लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और चारों तरफ भगवान शिव के जयकारे गूंज रहे थे।.
तभी अचानक एक तरफ पोल गिरने की बात सामने आई। इसके बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का करंट लोगों के बीच फैल गया है। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई।
लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। भीड़ का दबाव बढ़ा तो बैरिकेडिंग टूट गई। इसके बाद कई श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कुछ ही देर में मौके पर चीख-पुकार मच गई।
हादसे में अब तक 7 महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है। 12 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह दर्दनाक हादसा कहां हुआ, जहां सावन सोमवार पर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे।
यह हादसा बिहार के लखीसराय जिले में प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर के पास हुआ। मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। दो ट्रेनों के एक साथ रुकने से भी अचानक भीड़ बढ़ने की बात प्रशासन की ओर से बताई गई है।
पोल गिरने के बाद कैसे बिगड़े हालात...
लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, श्रद्धालुओं की लाइन मंदिर से अशोकधाम स्टेशन तक पहुंच गई थी। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई गई थीं।
इसी दौरान पुरुषों की लाइन की तरफ एक खंभा गिर गया। इसके बाद लोगों में यह अफवाह फैल गई कि बिजली की चालू लाइन का तार श्रद्धालुओं पर गिर गया है।
डीएम के मुताबिक, गिरा हुआ तार मुख्य बिजली लाइन नहीं बल्कि केबल वायर, यानी डिश या इंटरनेट का तार था। हालांकि अफवाह फैलने के बाद पुरुषों की तरफ से भीड़ का दबाव महिलाओं की लाइन की ओर बढ़ गया।
दबाव बढ़ने पर महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगीं और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रशासन के मुताबिक घटना कुछ ही मिनटों में हुई।
दो ट्रेनें रुकीं तो अचानक बढ़ी भीड़...
डीएम शैलेंद्र कुमार ने बताया कि प्रशासन और पुलिस की टीम सुबह करीब 3 बजे से ही मौके पर मौजूद थी। मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर पहले से बैरिकेडिंग की गई थी।
सुबह करीब साढ़े छह बजे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ने लगी। इसी दौरान दो ट्रेनें भी वहां आकर रुकीं। ट्रेन से उतरने वाले श्रद्धालुओं के कारण मंदिर जाने वाले रास्ते पर भीड़ का दबाव और बढ़ गया।
इसके बाद स्थिति संभालना मुश्किल हो गया और बैरिकेडिंग टूटने के साथ भगदड़ की स्थिति बन गई। राहत एवं बचाव दल ने तुरंत लोगों को निकालना शुरू किया और घायलों को अस्पताल भेजा।
श्रद्धालुओं ने बताया, करंट की बात सुनकर भागने लगे लोग...
मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं के मुताबिक, भीड़ बहुत ज्यादा थी। इसी बीच पोल गिरने और करंट लगने की बात तेजी से फैल गई।
करंट की बात सुनते ही लोग घबराकर भागने लगे। पीछे से आ रहे लोगों के दबाव के कारण कई श्रद्धालु संभल नहीं पाए। इसी दौरान महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिर गईं।
एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया कि वह पूजा के लिए लाइन में खड़ी थी। अचानक पीछे से धक्का आया और वह गिर गई। कुछ समय के लिए वह बेहोश हो गई थी।
एक घायल युवती ने भी बताया कि बगल के खेत में पोल गिरा था और तार टूट गया था। उसके मुताबिक, वह करंट की चपेट में आने के बाद बेहोश हो गई थी। हालांकि घटना में करंट की वास्तविक भूमिका को लेकर प्रशासन की जांच जारी है।
SDPO बोले- जांच के बाद स्पष्ट होगी सही वजह...
SDPO शिवम कुमार ने बताया कि घटना में सात लोगों की मौत की सूचना है और कई लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि बिजली का एक खंभा गिरने के बाद लोग बिजली की चपेट में आने की बात कह रहे थे, जिसके बाद भगदड़ जैसी स्थिति बनी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना की सही वजह पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सामने आएगी।
चार मृतकों की पहचान...
हादसे में जान गंवाने वाली चार महिलाओं की पहचान हो चुकी है। इनमें लखीसराय की मधुबाला देवी, मनमाला देवी और हेमलता देवी तथा मुंगेर की रिंकू देवी शामिल हैं।
घायलों में लखीसराय की मौसम कुमारी, मुस्कान कुमारी, ममता देवी, रीना कुमारी और शिवानी कुमारी शामिल हैं। इसके अलावा मोकामा की विमला देवी और बाढ़ की कबीला देवी के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से इलाज और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की जा रही है।
करीब 50 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे...
सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के मौके पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 50 हजार भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचे थे।
अशोकधाम मंदिर लखीसराय का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
इतनी बड़ी भीड़ के बीच हुई घटना ने भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पांच महीने पहले भी बिहार में हुआ था बड़ा हादसा...
बिहार में मंदिर में भगदड़ की यह घटना करीब पांच महीने के भीतर दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 31 मार्च को नालंदा के मघड़ा शीतला मंदिर में चैत्र के आखिरी मंगलवार के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे।
दर्शन की जल्दबाजी और धक्का-मुक्की के बाद वहां भगदड़ मच गई थी। उस हादसे में 8 महिलाओं समेत 9 लोगों की मौत हुई थी।
लखीसराय की ताजा घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ के दौरान सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के इंतजामों को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।
सीएम सम्राट चौधरी ने जताया दुख...
हादसे पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया है। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए।
फिलहाल प्रशासन मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटा है। घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में भीड़ बढ़ने, पोल गिरने और उसके बाद करंट फैलने की अफवाह को भगदड़ की अहम वजह बताया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने घटना की पूरी तस्वीर जांच के बाद स्पष्ट होने की बात कही है।
pooja