राव इंद्रजीत की पंजाबी समाज पर टिप्पणी से बवाल, बोले- हाथ पीछे खींचे तो सांसद तक नहीं बनोगे
गुरुग्राम में राव इंद्रजीत की पंजाबी समाज पर टिप्पणी से विवाद बढ़ा। पंजाबी समाज ने विरोध जताते हुए वोटों का हवाला दिया और बयान की निंदा की।
➤ राव इंद्रजीत की टिप्पणी पर पंजाबी समाज में आक्रोश
➤ सुरेंद्र खुल्लर बोले- हाथ पीछे खींचे तो सांसद-विधायक बनना मुश्किल
➤ ‘सिर्फ पंजाबी नाम से वोट नहीं मिलते’ बयान पर गरमाई गुरुग्राम की सियासत
गुरुग्राम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की पंजाबी समाज और स्वामी धर्मदेव को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। शुक्रवार को आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में राव इंद्रजीत के बयान के बाद पंजाबी समाज में नाराजगी सामने आई। रविवार देर शाम न्यू कॉलोनी स्थित गीता भवन में पंजाबी समाज की आपात बैठक हुई, जिसमें मंत्री के बयान की निंदा करते हुए नेताओं ने खुलकर विरोध जताया। बैठक में सनातन धर्म मंदिर के चेयरमैन सुरेंद्र खुल्लर, पूर्व सेक्रेटरी अरविंद गुप्ता, अरविंद उर्फ बंटू और पूर्व सैनिक गौतम शर्मा समेत पंजाबी समाज के कई लोग मौजूद रहे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र खुल्लर ने राव इंद्रजीत पर तल्ख हमला बोला। उन्होंने कहा कि राव इंद्रजीत सिंह आज जिस मुकाम पर हैं, वह पंजाबी समाज की वोटों की बदौलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय राव इंद्रजीत हाथ जोड़कर पंजाबी समाज के घरों तक वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन जीतने के बाद उसी समाज को कोसते हैं। खुल्लर ने कहा कि अगर पंजाबी समाज अपना हाथ पीछे खींच ले तो यहां से न कोई सांसद बन सकता है और न ही विधायक।
सुरेंद्र खुल्लर ने कहा कि यह सरकारी कार्यक्रम था और राव इंद्रजीत को विभाजन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने मंच से अपनी राजनीतिक खीज निकाली और पंजाबियों को अपमानित करने वाली टिप्पणी कर दी। उनके मुताबिक, राव इंद्रजीत की भाषा ने केवल गुरुग्राम ही नहीं, बल्कि पूरे देश के पंजाबी समाज के दिल को छलनी किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगली बार राव इंद्रजीत को पंजाबियों की एक भी वोट नहीं मिलेगी।
मामले की शुरुआत शुक्रवार को हुए कार्यक्रम से हुई थी। राव इंद्रजीत का नाम कार्यक्रम में बोलने के लिए प्रस्तावित सूची में नहीं था। इसी बात को लेकर उनकी नाराजगी सामने आई। बताया गया कि राव इंद्रजीत केवल कार्यक्रम में अपनी अनदेखी से ही आहत नहीं थे, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के ‘पंजाबी लॉबी’ के साथ अहीरवाल में सक्रिय रहने से भी नाराज हैं।
इसी नाराजगी के बीच राव इंद्रजीत ने मंच से पंजाबी समाज के राजनीतिक प्रभाव और वोटों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई सिर्फ पंजाबी नाम के ऊपर चुनाव लड़ता है तो मदान अकेले 48 हजार वोट ले गए, लेकिन जीत नहीं पाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा माहौल बना दिया गया है जैसे केवल पंजाबी ही सब कुछ हैं और बाकी लोगों का कोई योगदान नहीं है।
राव इंद्रजीत ने अपने बयान में अहीरवाल और 36 बिरादरी के राजनीतिक समीकरण की ओर भी इशारा किया। उन्होंने गुरुग्राम नगर निगम के 36 पार्षदों का आंकड़ा रखते हुए कहा कि इनमें केवल 2 पार्षद पंजाबी समाज से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री की कुर्सी केवल पंजाबी समाज ने नहीं दिलाई थी, बल्कि हरियाणा की 36 बिरादरियों के सामूहिक समर्थन की भूमिका थी।
राव इंद्रजीत के इस बयान के बाद पंजाबी समाज की बैठक में नेताओं ने कहा कि उनकी कौम लंबे समय से राजनीतिक रूप से निर्णायक भूमिका निभाती रही है। सनातन धर्म मंदिर के पूर्व सेक्रेटरी अरविंद गुप्ता ने कहा कि जो व्यक्ति छह बार का सांसद रहा हो, वह किसी सार्वजनिक मंच पर इस तरह का बचकाना बयान कैसे दे सकता है। उन्होंने कहा कि राव साहब को याद रखना चाहिए कि पंजाबी समाज ‘किंग मेकर’ रहा है और वह शहीदों की कौम है।
बैठक में अरविंद उर्फ बंटू ने कहा कि पंजाबी समाज ने हमेशा अपनी कौम से ऊपर उठकर देशहित और पार्टी हित में वोट दिया है। उन्होंने कहा कि समाज ने राज बब्बर को न चुनकर राव इंद्रजीत को चुना और मोहित ग्रोवर को छोड़कर मुकेश शर्मा को जिताया। इसके बावजूद बदले में अपमान मिला। उन्होंने कहा कि अगर राव इंद्रजीत को अपनी राजनीतिक खीज निकालनी है तो वह भाजपा की आंतरिक बैठकों में निकालें।
पूर्व सैनिक गौतम शर्मा ने राव इंद्रजीत की नाराजगी को व्यक्तिगत अहंकार और ‘खुंदक’ का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि राव इंद्रजीत इस बात से नाराज थे कि कार्यक्रम के आयोजक उन्हें व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण देने उनके घर क्यों नहीं गए। गौतम शर्मा के मुताबिक, यह एक सरकारी कार्यक्रम था और इसका आमंत्रण सरकार की तरफ से भेजा गया था।
गौतम शर्मा ने आरोप लगाया कि इसी छोटी सी बात को लेकर राव इंद्रजीत इतने नाराज थे कि मंच पर आते ही जो उनके मुंह में आया, उन्होंने बोल दिया। उन्होंने कहा कि राव इंद्रजीत ने मंच पर अपनी ‘दादागिरी’ दिखाने की कोशिश की। पूर्व सैनिक ने इसे राव इंद्रजीत का अहंकार बताया।
इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक सरकारी कार्यक्रम में हुई नाराजगी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अहीरवाल बनाम पंजाबी लॉबी के बीच राजनीतिक वर्चस्व की चर्चा भी इसके साथ जुड़ गई है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से भाजपा के भीतर गैर-जाट और पंजाबी समीकरण को मजबूत करने की कोशिशों की चर्चा रही है। मनोहर लाल खट्टर की गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में प्रशासनिक और सामाजिक सक्रियता बढ़ने की बात भी सामने आती रही है। ऐसे में राव इंद्रजीत की टिप्पणी को अपनी राजनीतिक जमीन और प्रभाव को लेकर दिए गए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
राव इंद्रजीत ने मंच से ‘वोट बैंक के गणित’ और दक्षिण हरियाणा के राजनीतिक समीकरण को भी सामने रखा। उनके बयान में अहीर यानी यादव और स्थानीय मूल निवासी मतदाताओं की संख्या तथा उनकी भूमिका का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि अहीरवाल के राजनीतिक समीकरण की अनदेखी किसी भी दल के लिए भारी पड़ सकती है।
उनके बयान का एक अहम हिस्सा यह भी रहा कि “याद रखना, ताली दोनों हाथों से बजती है।” इसे संगठन और पार्टी नेतृत्व के लिए एक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया। इसके साथ ही उन्होंने खुद को केवल एक जाति तक सीमित रखने के बजाय 36 बिरादरी के व्यापक राजनीतिक नैरेटिव के साथ जोड़ने की कोशिश की।
मामला आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे और लोकसभा सीट से जुड़े राजनीतिक समीकरणों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है। राव इंद्रजीत को आशंका है कि खट्टर खेमा अहीरवाल की महत्वपूर्ण सीटों पर अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालक की ओर से रोकने पर राव इंद्रजीत के माइक छोड़कर नीचे उतर जाने की बात भी सामने आई। इसे उनके खेमे की नाराजगी और पार्टी नेतृत्व को दिए गए सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
राव इंद्रजीत की राजनीतिक नाराजगी का इतिहास भी इससे जुड़ा हुआ है। 2014 में अहीरवाल की अनदेखी और रोहतक-केंद्रित विकास का आरोप लगाकर राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस छोड़ी थी और भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा में लगातार चुनाव जीतने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं मिला। अब विभाजन विभीषिका स्मृति कार्यक्रम में अपनी अनदेखी के बाद उनकी नाराजगी फिर खुलकर सामने आई है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर अहीरवाल की राजनीति, पंजाबी समाज के वोट बैंक और भाजपा के भीतर अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ पंजाबी समाज राव इंद्रजीत की टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए विरोध कर रहा है, तो दूसरी तरफ राव इंद्रजीत के बयान में अहीरवाल और 36 बिरादरी के राजनीतिक महत्व का संदेश साफ दिखाई देता है। आने वाले समय में यह विवाद किस तरह राजनीतिक रूप लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Akhil Mahajan