नारनौल में तीन बहनों का एक साथ निकला बनवारा बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर परिवार ने दिया समानता का संदेश
हरियाणा के नारनौल में फल विक्रेता की तीन बेटियों की एक साथ शादी से पहले अनोखा बनवारा निकाला गया। ताऊ ने तीनों बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर समाज को बेटियों के सम्मान का संदेश दिया।
■ नारनौल में फल विक्रेता की तीन बेटियों की एक साथ हो रही शादी
■ ताऊ ने बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर लड़कों की तरह निकाला बनवारा
■ एक दूल्हा बैंक क्लर्क, दूसरा प्राइवेट कंपनी कर्मी, तीसरा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने नारी सम्मान और सामाजिक सोच में बदलाव का संदेश दिया। यहां फल विक्रेता मनोज कुमार की तीन बेटियों की एक साथ शादी होने जा रही है। इस खुशी में परिवार ने एक अनोखी परंपरा निभाते हुए तीनों बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर लड़कों की तरह बनवारा निकाला।
यह दृश्य देखकर मोहल्ले के लोग भी भावुक और उत्साहित नजर आए। मोहल्ला मिश्रवाड़ा में निकले इस बनवारे में लोगों ने डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए बेटियों की शादी की खुशियां मनाईं।तीनों बहनों के इस खास बनवारे का आयोजन उनके ताऊ कृष्ण कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लड़का और लड़की में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और उन्हें भी वही सम्मान मिलना चाहिए जो बेटों को दिया जाता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर पूरे मोहल्ले में बनवारा निकाला, जो आमतौर पर लड़कों की शादी में निकाला जाता है। इस पहल को देखकर लोगों ने परिवार की जमकर सराहना की।
अलग-अलग घोड़ियों पर बैठीं तीनों बहनें
बनवारे के दौरान तीनों बहनें अलग-अलग घोड़ियों पर बैठी हुई थीं और पूरा माहौल उत्सव में बदल गया था। आसपास के लोग, रिश्तेदार और दोस्त इस अनोखे बनवारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
डीजे की धुन पर लोग झूमते रहे और पूरा मोहल्ला शादी के जश्न में डूबा नजर आया।
परिवार के अनुसार सबसे छोटी बेटी विशाखा बीए पास है और उसकी शादी सर्व हरियाणा बैंक के क्लर्क अमन के साथ होगी।
सबसे बड़ी बेटी आशा बीए की पढ़ाई कर रही है और उसकी शादी रेवाड़ी के बावल स्थित एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले मयंक के साथ तय हुई है। इन दोनों की बारात महेंद्रगढ़ जिले के गांव दौंगड़ा से आएगी।
वहीं बीच वाली बेटी मनीषा, जो बारहवीं तक पढ़ी है, उसकी शादी गांव बुडीन के भूप सिंह के साथ होगी, जो इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
बनवारे से पहले परिवार की ओर से सहभोज का आयोजन भी किया गया था। इसमें रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के लोगों ने मिलकर भोजन किया।
इसके बाद तीनों बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर बैंड-बाजे और डीजे के साथ बनवारा निकाला गया, जिसमें पूरे मोहल्ले ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
यह आयोजन न केवल शादी की खुशी का प्रतीक बना बल्कि समाज को बेटियों के सम्मान और समानता का मजबूत संदेश भी दे गया।
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