हिमाचल में पंचायत चुनाव का ऐलान, तीन चरणों में होगा मतदान, जानें पूरा शौड्यूल

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का एलान हो गया है। तीन चरणों में मतदान होगा और आचार संहिता लागू कर दी गई है। 51 लाख से अधिक मतदाता भाग लेंगे।

हिमाचल में पंचायत चुनाव का ऐलान, तीन चरणों में होगा मतदान, जानें पूरा शौड्यूल

➤ हिमाचल में पंचायत चुनाव का एलान, तीन चरणों में होगा मतदान
➤ आचार संहिता लागू, सरकार की नई घोषणाओं पर लगी रोक
➤ 51 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे वोट, 15 हजार से अधिक सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित


हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार दोपहर 3:40 बजे प्रेस वार्ता कर चुनाव कार्यक्रम जारी किया। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने इसकी औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे। 29 अप्रैल को अधिसूचना जारी होगी, जबकि 7, 8 और 11 मई तक नामांकन भरे जाएंगे। 12 मई को नामांकन की जांच होगी और 14 व 15 मई को नाम वापसी का समय रहेगा। मतदान 26 मई, 28 मई और 30 मई को तीन चरणों में कराया जाएगा।

प्रदेश में इस बार कुल 31,182 सीटों पर चुनाव होंगे। हालांकि कुल्लू जिले की 4 पंचायतों में चुनाव नहीं होंगे। पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य के पदों के लिए मतदान कराया जाएगा, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति इसके दायरे से अलग हैं।

चुनाव में 15,656 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। प्रदेश में कुल 50,79,048 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 85 वर्ष से अधिक आयु के करीब 50 हजार मतदाता भी शामिल हैं।

राज्यभर में 21,678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। खास बात यह है कि सबसे ऊंचाई वाला मतदान केंद्र 4587 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है। मतदान के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर वीडियोग्राफी कराई जाएगी और दो स्तर पर मतगणना होगी।

इस बार मतदान के लिए पांच अलग-अलग बैलेट पेपर का उपयोग किया जाएगा। प्रधान के लिए हल्का हरा, उपप्रधान के लिए पीला, पंचायत सदस्य के लिए सफेद, पंचायत समिति के लिए गुलाबी और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का नीला बैलेट पेपर निर्धारित किया गया है।

आचार संहिता लागू होने के बाद अब सरकार कोई नई घोषणा, भर्ती, ट्रांसफर, प्रमोशन या शिलान्यास नहीं कर सकेगी। सरकारी मशीनरी का चुनावी उपयोग भी प्रतिबंधित रहेगा।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा से हटाया गया व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेगा। वहीं, सरकारी कर्मचारी किसी उम्मीदवार का एजेंट नहीं बन सकते, ऐसा करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

इसके अलावा, पंचायत चुनाव लड़ने के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है, यानी अनपढ़ व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यह पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 मई से पहले पूरी की जाएगी। चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही प्रदेश में चुनावी माहौल पूरी तरह सक्रिय हो गया है।