हाईकोर्ट की हरियाणा-पंजाब सरकार को बड़ी फटकार: हर जिला अस्पताल में CT scan, MRI और ICU जरूरी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों राज्य सरकारों को हर जिला अस्पताल में CT Scan, MRI और ICU सुविधा उपलब्ध कराने तथा डॉक्टरों के खाली पद तुरंत भरने के आदेश दिए हैं।
➤ हाईकोर्ट ने पंजाब-हरियाणा सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाई फटकार
➤ हर जिला अस्पताल में CT Scan, MRI और ICU अनिवार्य करने के आदेश
➤ डॉक्टरों के खाली पद तुरंत भरने और 6 जुलाई तक रिपोर्ट देने के निर्देश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए दोनों राज्य सरकारों को बड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की है और हर जिला अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश दिया कि हर जिला अस्पताल में कम से कम एक CT Scan मशीन, एक MRI मशीन और ICU सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि इन सुविधाओं का संचालन निजी कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
हाईकोर्ट ने दोनों सरकारों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों के खाली पदों को भरने के लिए तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। अदालत ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो बेहद गंभीर स्थिति है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
• हर जिला अस्पताल में CT Scan मशीन जरूरी
• हर जिला अस्पताल में MRI सुविधा अनिवार्य
• जरूरत के अनुसार ICU बेड उपलब्ध कराए जाएं
• मशीनों का संचालन सरकारी स्टाफ करे
• डॉक्टरों और विशेषज्ञों के खाली पद तुरंत भरे जाएं
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य में हजारों पद खाली पड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार मेडिकल ऑफिसर (जनरल) के 3,665 स्वीकृत पदों में से बड़ी संख्या खाली है, जबकि स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के भी सैकड़ों पद रिक्त हैं। कुल मिलाकर करीब 2,877 पद खाली बताए गए हैं।
वहीं हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को भी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि सरकार के हलफनामे में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि सामान्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
यह पूरा मामला मालेरकोटला के सिविल अस्पताल में सुविधाओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ था। सुनवाई के दौरान सामने आया कि अस्पताल में ICU जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला अस्पतालों में ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है।
हाईकोर्ट ने दोनों सरकारों को आदेश दिया है कि वे आवश्यक मशीनों और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करें तथा 6 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करें। माना जा रहा है कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार हो सकता है।
Akhil Mahajan