नहीं बढ़ेगी होम या कार लोन पर आपकी EMI, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर रखा बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। फैसले से होम, कार और पर्सनल लोन की EMI में बढ़ोतरी नहीं होगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।
- RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया
- होम, कार और पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी
- ब्याज दरों में स्थिरता से रियल एस्टेट, ऑटो और निवेश क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। यह निर्णय समिति के सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की।
यह लगातार दूसरी बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले भी फरवरी 2026 की बैठक में रेपो रेट को यथावत रखा गया था। RBI का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पिछले वर्ष जनवरी 2025 से जून 2026 तक RBI ने रेपो रेट में कुल चार बार कटौती की थी। इस दौरान ब्याज दरें 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत पर पहुंच गईं। यानी कुल 125 बेसिस पॉइंट की राहत आम लोगों और उद्योग जगत को मिली। फरवरी 2025 और अप्रैल 2025 में 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी, जबकि जून 2025 में 0.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती हुई। इसके बाद दिसंबर 2025 में भी 0.25 प्रतिशत की कमी की गई।
रेपो रेट स्थिर रहने का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जिन्होंने फ्लोटिंग रेट होम लोन या अन्य बैंक ऋण ले रखे हैं। ब्याज दरों में कोई वृद्धि नहीं होने से उनकी EMI में बढ़ोतरी की आशंका फिलहाल समाप्त हो गई है। नए घर या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है क्योंकि उन्हें मौजूदा कम ब्याज दरों पर ही लोन उपलब्ध हो सकेगा।
हालांकि पिछले एक वर्ष में हुई कटौतियों का असर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों पर देखने को मिला है। कई बैंकों ने जमा योजनाओं पर मिलने वाले रिटर्न में कमी की है। इसके बावजूद RBI द्वारा दरों को स्थिर रखने से फिलहाल FD निवेशकों को मौजूदा ब्याज दरों का लाभ मिलता रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता से रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर सेक्टर को समर्थन मिलेगा। EMI बढ़ने की चिंता कम होने से घरों और वाहनों की मांग में तेजी आ सकती है। इससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
RBI ने संकेत दिया है कि वह घरेलू आर्थिक वृद्धि, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाए हुए है।
Akhil Mahajan