रोहतक अग्निकांड पर CM सैनी का बड़ा ऐलान, मृतकों के परिजनों को 10 लाख सहायता
रोहतक अग्निकांड में तीन लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहायता राशि का ऐलान किया है। वहीं जांच में आग फैलने के पीछे पांच बड़ी चूकें भी सामने आई हैं।
- रोहतक डी-पार्क अग्निकांड में तीन लोगों की मौत पर मुख्यमंत्री ने जताया दुख
- मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख और घायलों को 2-2 लाख रुपये सहायता देने की घोषणा
- हादसे के पीछे सामने आईं पांच बड़ी चूकें, जिनसे आग ने विकराल रूप धारण किया
रोहतक के डी-पार्क स्थित 10 दुकानों में लगी भीषण आग में तीन लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं हादसे में घायल लोगों को 2-2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा सभी घायलों का सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने उपायुक्त रोहतक को हादसे से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि घटना के सभी पहलुओं की समीक्षा की जा सके।
इधर, शुरुआती जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में इस अग्निकांड के पीछे कई गंभीर चूकें सामने आई हैं। इन्हीं कारणों से कुछ मिनटों में शुरू हुई आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते 10 दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।
जानकारी के अनुसार दोपहर करीब 2 बजे सबसे पहले रोहतक शूज शोरूम में आग लगी थी। इसके बाद आग तेजी से फैलती हुई आसपास की दुकानों तक पहुंच गई। हादसे में शोरूम मालिक समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड के पहुंचने में देरी हुई, जिससे आग को फैलने का पर्याप्त समय मिल गया। शुरुआती आधे घंटे में आग पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका और लपटें लगातार दूसरी दुकानों तक फैलती चली गईं।
हादसे में दूसरी बड़ी चूक फायर एक्सटिंग्विशर के काम नहीं करने को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि दुकान के बाहर रखे गए फायर एक्सटिंग्विशर करीब दो साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। यदि शुरुआती समय में आग बुझाने के उपकरण प्रभावी रूप से काम करते तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
तीसरी और सबसे दर्दनाक स्थिति तब बनी जब आग के बीच शोरूम का शटर नीचे आ गया। अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर निकलने का रास्ता नहीं खोज पाए। तेजी से फैलते धुएं और बढ़ती गर्मी के बीच बचाव का समय लगातार कम होता गया।
चौथा कारण दुकानों के बाहर खड़ी बाइक और स्कूटियां बनीं। आग की चपेट में आने के बाद वाहनों की टंकियों में मौजूद पेट्रोल ने आग को और भड़का दिया। इससे आग की तीव्रता कई गुना बढ़ गई और राहत कार्य प्रभावित हुआ।
इसके अलावा दुकानों में मौजूद रबर और कपड़े का भारी स्टॉक भी आग के विकराल रूप लेने का बड़ा कारण बना। जूते और अन्य ज्वलनशील सामान लगातार जलते रहे, जिससे धुआं और तापमान दोनों बढ़ते गए। इसी वजह से आग पर पूरी तरह काबू पाने और कूलिंग ऑपरेशन में कई घंटे लग गए।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा विस्तृत रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
Akhil Mahajan