गर्दन की चोट से उबरकर विश्व मंच पर फिर किया कमाल, दूसरी बार अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियन बनकर सतिंदर ने रचा इतिहास
हिसार के सुल्तानपुर गांव के 17 वर्षीय पहलवान सतिंदर मलिक ने गर्दन की चोट से उबरकर अजरबैजान में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
➤ लगातार दूसरी बार अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियन बनकर भारत का बढ़ाया मान
➤ गर्दन की चोट के बावजूद की दमदार वापसी, फाइनल में रूस के पहलवान को 3-1 से हराया
➤ सुशील कुमार के बाद लगातार दो कैडेट विश्व खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष पहलवान बने
हिसार जिले के सुल्तानपुर गांव के 17 वर्षीय पहलवान सतिंदर मलिक ने संघर्ष, जज्बे और मेहनत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। गर्दन की गंभीर चोट से उबरने के बाद उन्होंने अजरबैजान के बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय कुश्ती के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया।
60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल मुकाबले में सतिंदर मलिक ने रूस के सर्गेई कर्मरियन को 3-1 से हराकर अपना विश्व खिताब बरकरार रखा। इस जीत के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि मुश्किल परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं सकतीं।
चोट के बाद भी नहीं टूटा हौसला
विश्व चैंपियनशिप से करीब दो महीने पहले अभ्यास के दौरान सतिंदर की गर्दन में चोट लग गई थी। चोट के कारण उनका नियमित प्रशिक्षण प्रभावित हुआ और कुछ समय तक सीमित अभ्यास ही कर पाए। इसके बावजूद उन्होंने फिजियोथेरेपी, अनुशासित तैयारी और मजबूत मानसिकता के दम पर शानदार वापसी की।
विश्व मंच पर लौटने के बाद सतिंदर की तेज आक्रामक शैली, मजबूत डिफेंस और बेहतरीन तकनीक के सामने पूरे टूर्नामेंट में कोई भी प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं पाया।
सुशील कुमार के बाद रचा नया इतिहास
लगातार दूसरी बार अंडर-17 (कैडेट) विश्व कुश्ती चैंपियन बनने के साथ सतिंदर मलिक, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के दूसरे पुरुष फ्रीस्टाइल पहलवान बन गए हैं। उनकी इस सफलता को भारतीय कुश्ती के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गांव में हुआ भव्य स्वागत
विश्व चैंपियन बनकर स्वदेश लौटने पर सुल्तानपुर गांव में सतिंदर मलिक का जोरदार स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से सम्मानित किया और उन्हें कंधों पर बैठाकर विजय जुलूस निकाला। पूरे गांव में जश्न का माहौल देखने को मिला।
कोच बोले- अनुशासन ने दिलाई सफलता
इंटरनेशनल कोच संजय मलिक ने कहा कि सतिंदर की सबसे बड़ी ताकत उनका अनुशासन, मेहनत और लगातार सीखने की इच्छा है। यही गुण उन्हें अन्य पहलवानों से अलग बनाते हैं और भविष्य में भी देश के लिए बड़ी उपलब्धियां दिलाएंगे।
Akhil Mahajan