102 वर्षीय दादी के लिए बने श्रवण कुमार पालकी में बैठाकर कराई हरिद्वार यात्रा

यमुनानगर में 102 वर्षीय दादी को पोते और दोहते ने पालकी में बैठाकर हरिद्वार दर्शन कराए। श्रवण कुमार जैसी सेवा देखकर लोग भावुक हो गए और दादी ने बच्चों को दिल से आशीर्वाद दिया।

102 वर्षीय दादी के लिए बने श्रवण कुमार पालकी में बैठाकर कराई हरिद्वार यात्रा

102 वर्षीय दादी को पालकी में बैठाकर पोता-दोहता लेकर पहुंचे हरिद्वार

श्रवण कुमार जैसी सेवा देख रास्तेभर लोगों ने किया सम्मान

दादी बोलीं- भगवान हर घर को ऐसे संस्कारी बच्चे दे

सावन के पावन महीने में यमुनानगर से एक ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। कलानौर नाके पर एक अनोखी कांवड़ यात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस यात्रा में 102 वर्षीय सुनहरी पालकी में बैठी थीं, जबकि उनके पोते और दोहते उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर हरिद्वार की तीर्थ यात्रा कराकर वापस पटियाला लौट रहे थे।

यह अनोखी यात्रा श्रवण कुमार की कथा की याद दिला गई। दोनों युवकों ने अपनी बुजुर्ग दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार के हर की पौड़ी तक पहुंचाया, वहां स्नान और दर्शन कराए तथा अब गंगाजल लेकर करीब 300 किलोमीटर की वापसी यात्रा पूरी कर रहे हैं। इस दृश्य को देखकर रास्तेभर लोग भावुक हो गए और दोनों युवकों की जमकर सराहना की।

102 वर्षीय सुनहरी ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जीवन के इस पड़ाव पर उनके पोते और दोहते उन्हें इस तरह पालकी में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बच्चों पर गर्व है और भगवान हर परिवार को ऐसे संस्कारी और सेवा भाव रखने वाले बच्चे दें। उनके लिए यह जीवन का सबसे यादगार पल बन गया।

पोते सिमरन ने बताया कि वे पटियाला के रहने वाले हैं। उनके पिता की लंबे समय से इच्छा थी कि जैसे श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को पालकी में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी, उसी तरह उनकी मां यानी दादी सुनहरी को भी हरिद्वार के दर्शन कराए जाएं। पिता की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने यह संकल्प लिया।

इस सेवा यात्रा में 17 वर्षीय दोहता विराट भी पूरे समर्पण के साथ शामिल हुआ। वह संगरूर का रहने वाला है। विराट ने बताया कि जब उसे परिवार की इच्छा के बारे में पता चला तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के इस यात्रा का हिस्सा बनने का फैसला किया। इस यात्रा में उसकी मां भी साथ चल रही हैं।

दादी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से मजबूत और आरामदायक पालकी तैयार कराई गई। पूरी यात्रा के दौरान समय-समय पर विश्राम भी कराया गया, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। जहां-जहां से यह पालकी गुजरी, लोग रुककर दादी का आशीर्वाद लेते रहे और दोनों युवकों का उत्साह बढ़ाते रहे। यमुनानगर के कलानौर नाके पर भी यह अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी रही।