हरियाणा के चार इंजीनियरों की ‘बैकडोर एंट्री’ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PWD के प्रमोट अफसर होंगे डिमोट

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हरियाणा के चार इंजीनियरों की ‘बैकडोर एंट्री’ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PWD के प्रमोट अफसर होंगे डिमोट

➤ सुप्रीम कोर्ट ने चार SDO इंजीनियरों का अवशोषण किया रद्द, इसे नियमों के खिलाफ बताया
➤ 18 साल की सेवा और सहानुभूति भी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती: सुप्रीम कोर्ट
➤ चारों अधिकारियों को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग में तत्काल वापस भेजने का आदेश


सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के लोक निर्माण विभाग (Building & Roads Branch) में चार Sub-Divisional Officers के डेपुटेशन के बाद किए गए अवशोषण को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस प्रक्रिया को नियमों के विपरीत बताते हुए कहा कि यह ‘बैकडोर एंट्री’ के समान थी। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को भी पलट दिया, जिसमें अधिकारियों की 18 वर्ष से अधिक की सेवा को देखते हुए सहानुभूति के आधार पर उनकी सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने चारों अधिकारियों को उनके मूल विभाग में तत्काल वापस भेजने का निर्देश दिया है।

यह फैसला Hemant Kumar & Ors. v. State of Haryana & Connected Matters से जुड़े सिविल अपीलों के एक समूह पर आया है। मामले की सुनवाई Justice Manoj Misra और Justice Ujjal Bhuyan की पीठ ने की। फैसला Justice Ujjal Bhuyan ने लिखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक सेवा करने या प्रशासनिक जरूरत का हवाला देने से ऐसी नियुक्ति को वैध नहीं बनाया जा सकता, जिसकी शुरुआत ही निर्धारित भर्ती नियमों के उल्लंघन से हुई हो।

सुप्रीम कोर्ट ने अवशोषण को माना शून्य और अवैध

सुप्रीम कोर्ट ने Shri Pradeep Atri, Shri Praveen Chaudhary, Shri Pankaj Gaur और Shri Arun Bhatia के PW (B&R) Department में अवशोषण को non est और void करार दिया। अदालत के अनुसार यह प्रक्रिया Punjab Service of Engineers, Class II, P.W.D. (B&R Branch) Rules, 1965 का पूरी तरह उल्लंघन थी।

अदालत ने कहा कि इन नियमों के तहत कैडर के 100 प्रतिशत पदों का प्रावधान पहले से निर्धारित है। इनमें 50 प्रतिशत पद direct recruitment और 50 प्रतिशत promotion के माध्यम से भरे जाने हैं। ऐसे में डेपुटेशन के रास्ते अधिकारियों को लाकर बाद में स्थायी रूप से अवशोषित करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी।

Rule 10 के ‘Special Circumstances’ का भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने Rule 10 के तहत नियुक्ति या ट्रांसफर के लिए आवश्यक “special circumstances” की भी व्याख्या की। पीठ ने कहा कि सामान्य प्रशासनिक रिक्तियां या कर्मचारियों की कमी ऐसी विशेष परिस्थितियां नहीं हैं, जिनके आधार पर निर्धारित भर्ती व्यवस्था को दरकिनार किया जा सके।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल स्टाफ की कमी या प्रशासनिक जरूरत के आधार पर नियमों में निर्धारित भर्ती प्रक्रिया को छोड़ा नहीं जा सकता। अदालत के मुताबिक Rule 10 के तहत विशेष परिस्थितियों की वैधानिक आवश्यकता पूरी होना जरूरी है।

18 साल की सेवा भी नहीं बचा सकी नौकरी

इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 15 मार्च 2023 के अपने फैसले में अधिकारियों को उनकी 18 वर्ष से अधिक की सेवा को देखते हुए राहत दी थी। हाई कोर्ट ने सहानुभूति के आधार पर उन्हें सेवा से हटाने के बजाय उनकी सेवा जारी रखने का रास्ता अपनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि लंबे समय तक की गई सेवा किसी ऐसी नियुक्ति को नियमित नहीं कर सकती, जिसकी शुरुआत ही अवैध तरीके से हुई हो। अदालत ने इस आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया।

चारों अधिकारियों के मामलों में क्या कहा गया

सुप्रीम कोर्ट ने चारों अधिकारियों के मामलों को अलग-अलग परिस्थितियों में देखा। Pradeep Atri और Praveen Chaudhary के मामले में अदालत ने उनकी डेपुटेशन और बाद में अवशोषण की प्रक्रिया को गंभीर सेवा अनुशासनहीनता तथा मंत्री स्तर की सिफारिशों से जुड़ा पाया।

अदालत के अनुसार दोनों अधिकारी उस समय अपने मूल विभाग में probation period में सेवा कर रहे थे। Pradeep Atri के मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि उन्होंने उस पद के लिए direct recruitment test में सफलता हासिल नहीं की थी, जिसमें बाद में उन्हें transfer के माध्यम से प्रवेश मिला।

वहीं Pankaj Gaur और Arun Bhatia के मामले में उनकी शुरुआती requisitioned deputation को पूरी तरह अवैध के बजाय irregular माना गया। हालांकि, बाद में किया गया उनका permanent absorption सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य कर दिया। अदालत के अनुसार इस स्थायी अवशोषण के पीछे वास्तविक सार्वजनिक आवश्यकता के बजाय राजनीतिक सिफारिशों की भूमिका थी।

मूल विभाग में फिर से बहाल होगा अधिकारियों का lien

सुप्रीम कोर्ट ने चारों अधिकारियों को उनके मूल विभाग Development and Panchayat Department, Haryana में वापस भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध अवशोषण रद्द होने के साथ उनके मूल विभाग में मौजूद lien स्वतः revive हो जाएगा।

चारों अधिकारियों की वरिष्ठता भी उनके मूल विभाग में SDO (Panchayati Raj) cadre में निर्धारित की जाएगी। अदालत ने निर्देश दिया कि उनकी seniority उन अधिकारियों से ठीक ऊपर तय की जाए, जो मूल रूप से उनसे junior थे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मूल आधार

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में भर्ती और नियुक्ति की निर्धारित प्रक्रिया को प्रशासनिक जरूरत, रिक्तियों, लंबे कार्यकाल या सहानुभूति के आधार पर दरकिनार नहीं किया जा सकता। अदालत ने चारों अधिकारियों के PW (B&R) Department में किए गए अवशोषण को नियमों के विरुद्ध मानते हुए रद्द कर दिया।

इस फैसले के साथ अदालत ने चारों अधिकारियों की Development and Panchayat Department, Haryana में वापसी का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही उनकी seniority को SDO (Panchayati Raj) cadre में नियमों के अनुसार निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है।