मंत्री के आदेश पर 5 डॉक्टरों पर FIR, लापरवाही का बड़ा खुलासा

यमुनानगर में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में पट्टी छोड़ने और झूठी जांच रिपोर्ट बनाने के मामले में मंत्री के आदेश पर 5 डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज।

मंत्री के आदेश पर 5 डॉक्टरों पर FIR,  लापरवाही का बड़ा खुलासा

मंत्री के आदेश पर 5 डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही का केस दर्ज
सिजेरियन ऑपरेशन में महिला के गर्भ में छोड़ी गई सर्जिकल पट्टी
संक्रमण बढ़ा, आंत काटनी पड़ी, 8 माह बाद FIR



यमुनानगर जिले में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज छोड़ने और बाद में झूठी अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन रिपोर्ट बनाकर सच्चाई छिपाने के गंभीर मामले में आखिरकार आठ महीने बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के सख्त आदेशों के बाद की गई।

पुलिस ने एसपी अस्पताल जगाधरी की महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल को मुख्य आरोपी बनाते हुए उनके पति डिप्टी CMO डॉ. अनुप गोयल, इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉ. प्रदीप तेहलान, मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉ. निखिल मेहता और मॉडल टाउन स्थित चड्ढा अस्पताल के डॉ. कुलदीप चड्ढा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।

पंचकूला में महिला पेशेंट के गर्भ से ऑपरेशन कर निकाली गई पट्‌टी।

आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुई गंभीर मेडिकल लापरवाही को छिपाने के लिए आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर बार-बार झूठी अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन रिपोर्ट तैयार कीं। इससे पीड़िता को गलत इलाज की ओर धकेला गया और उसकी जान को गंभीर खतरे में डाला गया।

पीड़िता 21 वर्षीय मेहर खातून, पत्नी ओसामा, निवासी गांव बीबीपुर जगाधरी ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद अब उन्हें इंसाफ की उम्मीद जगी है। पीड़िता के पति ओसामा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उनकी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थी और किसी तरह की जटिलता नहीं थी।

ओसामा के अनुसार, 12 मार्च 2025 को वह अपनी गर्भवती पत्नी को चेकअप के लिए जगाधरी स्थित एसपी अस्पताल लेकर गए थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी और अगले दिन 13 मार्च 2025 को सुबह करीब 8:40 से 9:15 बजे के बीच महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल ने ऑपरेशन किया। आरोप है कि इस दौरान उनके पति डॉ. अनुप गोयल भी ऑपरेशन में शामिल थे।

ऑपरेशन के बाद मेहर ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया और परिवार ने राहत की सांस ली। इलाज पर करीब 70 हजार रुपये खर्च हुए और 15 मार्च 2025 को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

कुछ दिनों बाद महिला को टांकों के आसपास तेज दर्द, सूजन और कमजोरी होने लगी। हालत बिगड़ने पर 1 अप्रैल 2025 को परिजन उसे बुड़िया गांव स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि 3 अप्रैल 2025 को डायग्नोस्टिक सेंटर में अल्ट्रासाउंड के दौरान डॉक्टरों को गर्भ में सर्जिकल स्पंज होने का अंदेशा हो गया था, लेकिन जानबूझकर इसे छिपा लिया गया। इसके बावजूद नॉर्मल रिपोर्ट बनाकर पीड़िता को उसी अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी गई, जहां ऑपरेशन हुआ था।

बाद में भी कई बार जांच कराई गई, लेकिन हर बार सच्चाई छिपाई गई। संक्रमण बढ़ता गया और अंततः महिला की हालत गंभीर हो गई, जिसके चलते आंत काटनी पड़ी। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस हरकत में आई।