भाजपा की नई प्रदेशाध्यक्ष अर्चना गुप्ता बोलीं- नए और पुराने कार्यकर्ताओं का बनेगा बेहतर समन्वय

हरियाणा भाजपा की नई प्रदेशाध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने संगठन में समन्वय, महिला सशक्तीकरण और समाजसेवा को प्राथमिकता बताते हुए सरकार-संगठन संबंधों पर बड़ा बयान दिया।

भाजपा की नई प्रदेशाध्यक्ष अर्चना गुप्ता बोलीं- नए और पुराने कार्यकर्ताओं का बनेगा बेहतर समन्वय
  • भाजपा की नई प्रदेशाध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने संगठन में बदलाव के संकेत दिए
  • नए और पुराने कार्यकर्ताओं के समन्वय पर रहेगा विशेष फोकस
  • महिला सशक्तीकरण और समाजसेवा को बताया अपनी प्राथमिकता

हरियाणा भाजपा की नई प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने संगठन में नए और पुराने कार्यकर्ताओं के बेहतर समन्वय की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में कुछ बदलाव किए जाएंगे, लेकिन यह प्रक्रिया वरिष्ठ नेताओं से चर्चा और सामूहिक निर्णय के आधार पर होगी। उनका कहना है कि भाजपा में फैसले किसी एक व्यक्ति के नहीं बल्कि सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।

पानीपत की रहने वाली डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कि जब उन्हें प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी मिली, उस समय वह मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है जो बूथ स्तर के कार्यकर्ता को भी बड़ी जिम्मेदारी देने में विश्वास रखती है। यही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है।

संगठन में संभावित बदलावों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि नए और पुराने दोनों तरह के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर संगठन को आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी की प्राथमिकताओं और वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन के अनुसार ही आगे की रणनीति तय होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी निर्णय वरिष्ठ नेताओं, राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिए जाते हैं।

सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर उन्होंने किसी भी प्रकार की चुनौती से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन दोनों भाजपा के ही अंग हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाए रखते हैं। बूथ स्तर से मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले नेता स्वयं को सेवक मानते हैं और यही भाजपा की कार्यशैली की विशेषता है।

प्रदेशाध्यक्ष पद की दौड़ में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में थे। ऐसे में उन्हें जिम्मेदारी मिलने के सवाल पर अर्चना गुप्ता ने कहा कि इसमें महिला सशक्तीकरण की सोच महत्वपूर्ण रही होगी। उन्होंने कहा कि संगठन ने जो भी निर्णय लिया है, वह पार्टी की प्राथमिकताओं के आधार पर लिया गया होगा। वह स्वयं इसे महिलाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानती हैं।

अपनी राजनीतिक और सामाजिक यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं और शुरुआत से ही सेवा भावना से जुड़ी रही हैं। समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें अपने बेटे के एक सामाजिक प्रोजेक्ट से मिली। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने स्कूल के दौरान गरीब महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया था। इसी पहल ने उन्हें भी समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद उन्होंने चिकित्सा के माध्यम से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता देने का कार्य शुरू किया। पानीपत समेत आसपास के जिलों में उद्योगों में कार्यरत महिला श्रमिकों के बीच स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए। बाद में विश्व हिंदू परिषद से जुड़कर भी महिलाओं के लिए विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी निभाई।

राजनीति में सक्रिय होने के बाद पार्टी ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं। वह जिला अध्यक्ष रहीं और बाद में महिला मोर्चा की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो भी दायित्व दिया, उसे पूरी मेहनत और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास किया।

परिवार और समाजसेवा के बीच संतुलन के सवाल पर उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग के बिना कोई भी व्यक्ति बड़ी जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। उन्होंने अपने पति डॉ. अनिल गुप्ता और परिवार का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा पूरा सहयोग मिला है और आगे भी मिलता रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाजसेवा की गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी।

डॉ. अर्चना गुप्ता का जन्म 20 जनवरी 1968 को समालखा में हुआ था। उन्होंने पीजीआई रोहतक से एमडी की पढ़ाई की है और पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं। उनके पति डॉ. अनिल गुप्ता नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। उनके पुत्र अविरल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त की है, जबकि पुत्री आरुषि नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कार्यरत हैं।