सरकारी नौकरी में 90-99% घोटाले का दावा, बाबा रामदेव बोले- नहीं सुधरे हालात तो फिर करना पड़ सकता है आंदोलन

बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में 90-99% घोटाले का दावा करते हुए रिश्वत और सिफारिश पर सवाल उठाए और सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

सरकारी नौकरी में 90-99% घोटाले का दावा, बाबा रामदेव बोले- नहीं सुधरे हालात तो फिर करना पड़ सकता है आंदोलन

➤ सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में 90-99% घोटाले का दावा, जाति-वर्ग और संगठन के लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप

➤ स्कूल-कॉलेजों में बिजली-पानी और किताबों की कमी का मुद्दा उठाया, बोले- युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी

➤ बाबा रामदेव ने कहा- मैं आंदोलन या अराजकता का समर्थक नहीं, लेकिन घपले नहीं सुधरे तो फिर सड़कों पर उतरना पड़ सकता है


हरिद्वार। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ध्वजारोहण के बाद योग गुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में कथित गड़बड़ी, रिश्वतखोरी और भर्ती प्रक्रिया में सिफारिश को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने का दावा करते हुए कहा कि अपने संगठन, जाति और वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचाकर दूसरे उम्मीदवारों को बाहर कर दिया जाता है। बाबा रामदेव ने कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ऐसी स्थिति न बने कि उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरना पड़े। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अराजकता या आंदोलन के समर्थक नहीं हैं, लेकिन देश में हो रही गड़बड़ियों को ठीक करना जरूरी है।

बाबा रामदेव ने यह बात 15 अगस्त 2026 को हरिद्वार में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के दौरान कथित रिश्वत और सिफारिश की शिकायतों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि नौकरी के लिए होने वाले इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती हैं और इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

सरकारी नौकरी की भर्ती पर उठाए सवाल

सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं के बीच लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया को लेकर चिंता बनी रहती है। इसी संदर्भ में बाबा रामदेव ने भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के दौरान होने वाली कथित गड़बड़ी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के चयन में योग्यता के बजाय सिफारिश, रिश्वत और सामाजिक या संगठनात्मक पहचान को महत्व मिलने की शिकायतें सामने आती हैं।

बाबा रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरी में इंटरव्यू के दौरान 90-99% घोटाला होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने संगठन, जाति और वर्ग से जुड़े लोगों को जगह दी जाती है और बाकी लोगों को बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने इसे न्याय के खिलाफ बताया और कहा कि इंटरव्यू में पैसे लेकर और रिश्वत लेकर भर्ती होने की शिकायतों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

उनके इस बयान में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात उनकी आंदोलन को लेकर दी गई चेतावनी रही। उन्होंने कहा कि अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो देश में आंदोलन हो सकता है और ऐसा न हो कि उन्हें दोबारा आंदोलन करना पड़ जाए। हालांकि उन्होंने अपने बयान के साथ यह भी साफ किया कि वह आंदोलन और अराजकता के समर्थक नहीं हैं

स्कूल-कॉलेजों की सुविधाओं पर भी सवाल

बाबा रामदेव ने केवल सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को लेकर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि स्कूल और कॉलेजों की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि बच्चे स्कूल और कॉलेजों से शिकायत कर रहे हैं कि वहां बिजली और पानी की सुविधा नहीं है। उन्होंने किताबों की कमी का भी जिक्र किया।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक और मुद्दे की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि अगर कोई छात्र पेपर पास कर लेता है तो 10वीं और 12वीं के नंबर कहीं नहीं जुड़ते। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए चयन होता है। ऐसे में छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया और उसमें पारदर्शिता का महत्व और बढ़ जाता है।

बाबा रामदेव के मुताबिक युवाओं की शिकायतों को नजरअंदाज करने के बजाय व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करना जरूरी है। उनका कहना है कि शिक्षा से लेकर सरकारी भर्ती तक पूरी व्यवस्था में जहां भी गड़बड़ी है, उसे ठीक किया जाना चाहिए।

'देश में चारों तरफ हंगामा है'

बाबा रामदेव ने अपने बयान के दौरान कहा कि देश में चारों तरफ हंगामा है। उन्होंने सरकारी नौकरी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को युवाओं की नाराजगी से जोड़ते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं की शिकायतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक अगर स्कूल और कॉलेजों में बिजली, पानी और किताबों जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें हैं तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए। वहीं सरकारी नौकरी के चयन में अगर रिश्वत और सिफारिश की शिकायतें हैं तो उनकी जांच और सुधार की जरूरत है।

उनका कहना था कि व्यवस्था में गड़बड़ियां बनी रहीं तो इसका असर युवाओं के भरोसे पर पड़ सकता है। उन्होंने इसी संदर्भ में व्यवस्था सुधारने की जरूरत पर जोर दिया।

आंदोलन की चेतावनी, लेकिन अराजकता से दूरी

बाबा रामदेव ने अपने बयान में एक तरफ आंदोलन की चेतावनी दी, लेकिन दूसरी तरफ खुद को अराजकता और आंदोलन का समर्थक नहीं बताया। उन्होंने कहा कि वह आंदोलन या अराजकता के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अगर देश में हो रही गड़बड़ियों को ठीक नहीं किया गया तो स्थिति ऐसी हो सकती है कि उन्हें फिर आंदोलन करना पड़े।

उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर सरकारी नौकरियों में कथित घोटालों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों को उठाया है। साथ ही उन्होंने यह संकेत दिया कि अगर सुधार नहीं हुआ तो इस मुद्दे को लेकर आवाज और तेज हो सकती है।

नेताओं को भी दी साथ काम करने की नसीहत

बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों और नेताओं से भी आपस में लड़ने के बजाय देशहित में साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनेताओं को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। उनके मुताबिक लड़ने के लिए पाकिस्तान और विदेशी ताकतें हैं, इसलिए देश के नेताओं को आपस में नहीं लड़ना चाहिए।

उन्होंने नफरत को भी गलत बताया और कहा कि एक-दूसरे से नफरत नहीं करनी चाहिए। बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि देश में जो अच्छा हो रहा है, उसकी सराहना की जानी चाहिए।

युवाओं के मुद्दे से जुड़ा बड़ा बयान

बाबा रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकारी नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं की चिंताएं लगातार सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनी हुई हैं। उनके बयान में स्कूल-कॉलेज की सुविधाओं से लेकर सरकारी नौकरी के इंटरव्यू तक कई स्तरों पर व्यवस्था सुधारने की बात सामने आई।

उन्होंने एक ओर युवाओं की शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया और दूसरी ओर सरकारी नौकरी की भर्ती में कथित रिश्वत, सिफारिश और पक्षपात के आरोप लगाए। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की नौबत आ सकती है।

हालांकि सरकारी नौकरियों में 90-99% घोटाले का आंकड़ा बाबा रामदेव का दावा है, जिसे उन्होंने अपने बयान के दौरान रखा। इसे किसी स्थापित सरकारी आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके बयान का केंद्र भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और पारदर्शिता की जरूरत पर था।

अब नजर व्यवस्था में सुधार पर

बाबा रामदेव ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान सरकारी नौकरी की भर्ती व्यवस्था, स्कूल-कॉलेजों की सुविधाओं और राजनीतिक माहौल को लेकर कई मुद्दे एक साथ उठाए। सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है

उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में कथित रिश्वत और सिफारिश का मुद्दा उठाते हुए कहा कि योग्यता के आधार पर चयन होना चाहिए। साथ ही स्कूल-कॉलेजों में बिजली, पानी और किताबों जैसी बुनियादी सुविधाओं की शिकायतों को भी गंभीरता से लेने की जरूरत बताई।

फिलहाल बाबा रामदेव की ओर से दिया गया यह बयान सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस को जन्म दे सकता है। खास तौर पर उनका यह कहना कि हालात नहीं सुधरे तो उन्हें दोबारा आंदोलन करना पड़ सकता है, उनके पूरे बयान का सबसे अहम हिस्सा रहा।