“6 बजे हॉस्टल बंद? हम पढ़ने आए हैं, कैद होने नहीं!” — DCRUST छात्राओं का विरोध, राज्‍यपाल को भेजा ज्ञापन

DCRUST मुरथल की छात्राओं ने हॉस्टल शाम 6 बजे बंद होने के नियम को भेदभावपूर्ण बताया। राज्यपाल को पत्र देकर समय सीमा बढ़ाने और समानता आधारित नीति लागू करने की मांग की।

“6 बजे हॉस्टल बंद? हम पढ़ने आए हैं, कैद होने नहीं!” — DCRUST छात्राओं का विरोध, राज्‍यपाल को भेजा ज्ञापन

  • DCRUST मुरथल की छात्राओं ने हॉस्टल टाइमिंग में ढील की मांग की

  • शाम 6 बजे हॉस्टल बंद होने के नियम को बताया “भेदभावपूर्ण और प्रतिगामी”

  • छात्राओं ने राज्यपाल से विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश देने की अपील की


दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल की छात्राओं ने हॉस्टल के प्रतिबंधात्मक समय को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने हरियाणा के राज्यपाल को एक प्रतिनिधित्व पत्र (Representation Letter) सौंपते हुए शाम 6 बजे हॉस्टल बंद होने के नियम को “प्रतिगामी और भेदभावपूर्ण” बताया है।

छात्राओं का कहना है कि यह नियम उनकी शैक्षणिक और व्यक्तिगत वृद्धि में बाधा डाल रहा है। उन्होंने इसे “कर्फ्यू जैसा प्रतिबंध” बताते हुए समय सीमा में तत्काल संशोधन की मांग की है।

वर्तमान में DCRUST में छात्राओं के हॉस्टल शाम 6:00 बजे बंद और अगले दिन सुबह 6:30 बजे खुलते हैं। छात्राओं के अनुसार, इतनी लंबी अवधि का प्रतिबंध उनकी शैक्षणिक गतिविधियों, सेमिनारों, और प्रोजेक्ट चर्चाओं में भागीदारी को प्रभावित कर रहा है! छात्राओं ने पत्र में लिखा कि “हम शाम को होने वाले अकादमिक या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पातीं। यह नियम हमारी सीखने और बढ़ने की आज़ादी को सीमित करता है,”। 

छात्राओं ने कहा कि यह प्रतिबंध लैंगिक समानता (Gender Equality) और महिला सशक्तीकरण (Women Empowerment) के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य विश्वविद्यालयों में लड़कियों के हॉस्टल रात 9 या 10 बजे तक खुले रहते हैं, तो मुरथल में ऐसा कठोर नियम क्यों लागू है।


खासकर महिला खिलाड़ियों ने इस नीति को सबसे ज्यादा हानिकारक बताया। उन्होंने कहा कि शाम की प्रैक्टिस सत्र और अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं की तैयारी सूर्यास्त के बाद ही संभव होती है, लेकिन मौजूदा नियम के कारण वे प्रभावी अभ्यास नहीं कर पातीं। पत्र में लिखा गया कि “हम फिटनेस और परफॉर्मेंस दोनों में पिछड़ जाती हैं। यह हमारे खेल करियर को नुकसान पहुंचा रहा है,” — छात्रा खिलाड़ियों का कहना है।

छात्राओं ने यह भी कहा कि हरियाणा के अन्य राज्य विश्वविद्यालयों में हॉस्टल समय अधिक लचीला और आधुनिक है। ऐसे में DCRUST की नीति “पुरानी और असंगत” प्रतीत होती है। उन्होंने राज्यपाल कार्यालय से अनुरोध किया है कि वह विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दे कि हॉस्टल समय को “आधुनिक अकादमिक और सामाजिक आवश्यकताओं” के अनुरूप बदला जाए।

छात्राओं ने कहा कि “जिम्मेदारी के साथ स्वतंत्रता” (Freedom with Responsibility) सशक्तिकरण की असली परिभाषा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्यपाल का कार्यालय समानता और निष्पक्षता के मूल्यों को कायम रखते हुए इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान करेगा।