10 लड़कियों के बाद बेटा हुआ पैदा, ‘मेरी बेटियां चाहती थीं कि… पिता ने कह डाली ये बड़ी बात
फतेहाबाद में 10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म की कहानी ने सामाजिक सोच, आर्थिक संघर्ष और पिता के जज्बे को उजागर किया है।
- हरियाणा के फतेहाबाद में 10 बेटियों के बाद बेटे का जन्म
- हाई रिस्क डिलीवरी के बावजूद नॉर्मल प्रसव से गूंजी किलकारी
- बेरोजगारी और तंगी के बीच भी बेटियों की पढ़ाई से नहीं किया समझौता
फतेहाबाद (हरियाणा)। कहते हैं उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए। हरियाणा के ढाणी भोजराज गांव में रहने वाले संजय और सुनीता के घर 19 साल बाद बेटे का जन्म हुआ है। इससे पहले उनके यहां 10 बेटियां हैं। यह खबर सिर्फ एक बच्चे के जन्म की नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव, आर्थिक संघर्ष और बेटे की चाह से जुड़ी सोच को भी सामने लाती है।
हाई रिस्क डिलीवरी बनी चुनौती 37 वर्षीय सुनीता को जींद के उचाना स्थित ओजस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यह उनकी 11वीं डिलीवरी थी और केस को डॉक्टरों ने हाई रिस्क बताया। खून की भारी कमी के चलते तीन यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञों की मेहनत से नॉर्मल डिलीवरी हुई और बेटे ने जन्म लिया।
बेरोजगारी में भी जिम्मेदारी का बोझ संजय पहले PWD में दिहाड़ी मजदूर थे। 2018 में नौकरी चली गई। इसके बाद मनरेगा में काम किया, लेकिन अब वहां भी काम बंद है। आज संजय बेरोजगार हैं, लेकिन उनके ऊपर 9 बेटियों, एक बेटे, पत्नी और बुजुर्ग मां की जिम्मेदारी है।
संजय कहते हैं – “काम हो या न हो, बच्चों का पेट तो भरना ही पड़ता है। लोग ताने देते थे कि इतनी बेटियां कैसे पालोगे, लेकिन मैंने कभी उन्हें बोझ नहीं समझा। जो हुआ भगवान की मर्जी थी।” ‘मेरी बेटियां भी चाहती थीं भाई’ संजय का कहना है कि सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि बेटियों की भी इच्छा थी कि घर में एक भाई हो। अब उनकी यह इच्छा पूरी हो गई है।
बेटियों के नाम भूल गए पिता सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में संजय अपनी ही 10 बेटियों के नाम बताते समय अटकते नजर आए। हालांकि उन्होंने बताया कि उनकी सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं में पढ़ रही है। आर्थिक तंगी के बावजूद बेटियों की पढ़ाई जारी है। एक बेटी को बेहतर भविष्य के लिए रिश्तेदारी में गोद भी दिया गया है। खुशी या सामाजिक विडंबना? पोते के जन्म से संजय की मां बेहद खुश हैं, लेकिन यह घटना हरियाणा में बेटे की चाह और खराब लिंगानुपात जैसे गंभीर सवाल भी खड़े करती है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग परिवार के संघर्ष की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे “पुत्र मोह” और “जनसंख्या विस्फोट” बता रहे हैं।
Akhil Mahajan