गणपति भगवान को क्यों माना जाता है प्रथम पूज्य?

गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों माना जाता है? जानें गणेश और कार्तिकेय की परीक्षा और इसके पीछे छिपी रोचक पौराणिक कथा।

गणपति भगवान को क्यों माना जाता है प्रथम पूज्य?

हर शुभ काम से पहले क्यों होती है गणेश जी की पूजा?

गणेश जी ने बिना पृथ्वी की परिक्रमा किए कैसे जीत ली परीक्षा?

प्रथम पूज्य बनने के पीछे छिपी है रोचक पौराणिक कथा


सनातन धर्म में भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणपति पूजन से करने की परंपरा है। लेकिन आखिर गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाने का अधिकार कैसे मिला?

मान्यता के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश और कार्तिकेय के सामने परीक्षा रखी। दोनों से कहा गया कि जो सबसे पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, वही विजेता होगा।

कार्तिकेय तुरंत अपने मयूर पर सवार होकर निकल पड़े। गणेश जी ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया और भगवान शिव और माता पार्वती की तीन परिक्रमा कर उन्हें ही पूरी सृष्टि मान लिया।

गणेश जी की इस बुद्धिमत्ता से शिव-पार्वती प्रसन्न हुए और उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। तभी से हर शुभ कार्य से पहले गणपति की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

इसी वजह से भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता भी कहा जाता है। गणपति की कथा यह संदेश देती है कि जीवन में केवल गति नहीं, बल्कि बुद्धि और सही सोच भी सबसे बड़ी शक्ति होती है।